मायका

जाडो  की हल्की हल्की धूप मे आगंन में पडी चारपाई पर जमुना बड़ी सावधानी से गेंहू साफ कर रही थी । अचानक उसे अंदर कमरे मे कुछ शोर सुनाई दिया जिसे सुन वह उस ओर बढी देखा तो उसकी 8 साल की नातिन मीरा,उसे काम में लगा देख चुपके से उसकी साड़ी अपने गुडडे गुडियो की खेल के लिए ले जा रही थी। माई को देख बेचारी थोडा डर गई थी, उसके मासूम डरे हुए चहरे को देख अपनी हंसी दबाते हुए जमुना बोली मायके में  करले जितनी बदमाशी करनी है सासरे में कोई नहीं सुनेगा फिर तेरी।
यह बोल वो वापस गेंहू साफ करने लगी पर उसका मन उसके अभी अभी बोले हुए वाक्य में कहीं खो गया था। कैसे अम्मा भी बात बात पर सासरे की धमकी दिया करती थी और कैसे वो उसे हंस कर टाल दिया करती थी। 14 साल की थी वो जब  ब्याह कर आई थी अम्मा कितना सच कहती थी ये सासरे आकर पता चला। एक पल में बचपन छिन गया अब वह ब्याहता थी घर की जिम्मेदारियां थी उस पर। अब उसके नखरे सुनने वाला कोई नही था अब उसी को सबकी पसंद ना पसंद का ख्याल रखना था। सससुराल  वालों की पसंद को अपनी पसंद बना लिया। उसका रहन सहन, खान पान, वेश भूशा  सब बदल गया, मानो वह कोई नई व्यक्ति हो। आज 28 साल हो गये इस घर का ध्यान रखते रखते ठीक वैसे ही जैसे अम्मा रखा करती थी वो खुश है अपने परिवार की उन्नति मे आखिर उसका भी तो योगदान है। पर एक बात तो है सासरे में आने के बाद फिर कभी वो मायके वाली बेफिक्री वाली नींद नहीं आई । सासरे आकर फिर कभी वो लाड भरी तारीफ नही मिली।
एकदम से पीछे से बहू की आवाज  आती है अरे माई तू अकेले ही गेंहू साफ करने बैठ गई मुझे क्यों नही बुलाया? अरे तू छोटू को सुला रही थी इसलिए कहते हुए जमुना ने थोडा गेंहू बहू को साफ करने को दे दिया।

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