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अम्बरधरा

  धरा !! धरा!!  उठो मेरे बच्ची स्कूल नहीं जाना है क्या! स्कूल शब्द सुनते ही धरा तपाक से उठ गई। आज तो स्कूल में बास्केटबॉल मैच है। अम्बर भी पार्टिसिपेट कर रहा है तो वो स्कूल कैसे मिस कर सकती थी।  जल्दी से उठ कर वो तैयार हो कर वो पूजा घर मे गई। "हे भगवान! आज मेरे अम्बर को ज़रूर जिताना। आज मै सारा दिन उपवास करूंगी और जब वो जीत जाएगा तभी शाम में मैं अपना उपवास तोड़ूंगी! " ऐसा बोल कर धरा ने एक घी का दीपक भगवान के सामने जलाया। अरे! धरा बेटा ऐसा क्या मांग रही है भगवान से जल्दी नाश्ता कर ले बस आती होगी!, माँ ने आवाज़ दी। माँ आज बहुत लेट हो गयी हूँ। मैं बस निकल रही हूं।तुम टिफ़िन में ही रख दो रास्ते मे कहा लुंगी।, धरा ने बहाना बनाया। थोड़ा तो खा ले बेटा! कह रहे हैं ना बस में कहा लेंगे। चलो लेट हो रहे हैं बाय! ******** स्कूल पहुँच कर क्लास में जाते ही उसे अम्बर दिखा। हाय अम्बर! आज मैच है ना! ऑल द बेस्ट! थैंक्स! कहते हुए अम्बर तेज़ी से क्लास से बाहर निकल गया। अम्बर पर क्लास की हर लड़की फिदा थी। हो भी क्यों नहीं वो था ही सर्वगुण सम्पन्न। 6 फ़ीट हाइट, एथेलेटिक बॉडी, भूरी आंखे, गोरा रंग, पढ़ाई ...