वेलेंटाइनस डे

हर लड़की की तरह मीरा का भी सपना था कोई लड़का उसका बॅयायर्फन्ड बने। उसे क्यूट गुडनाईट गुडमार्निग के मेसेज भेजे। वेलेंटाइनस डे पर अच्छे-अच्छे  उपहार दे।

मीरा हालांकि दिखने मे ठीक-ठाक थी परन्तु  अब तक उसका कोई बॅयायर्फन्ड न था। स्कूल  से कालेज मे आ गई थी वह, उसकी सारी सहेलियों के बॅयायर्फन्डस थे। पहले उसको इस बात से कोई फर्क नही पडता था, परन्तु धीरे-धीरे उसे ये लगने लगा था शायद  वह सुंदर नही है।

वेलेंटाइनस डे निकट आ रहा था जहां उसकी सारी सहेलिया उस खास दिन की तैयारियों में व्यस्त थी। वहीं मीरा के मन को निराशा ने घेर रखा था। उस दिन वह बुझे मन से घर आई और घंटो अपने मुख को आईने मे निहारती रही। फिर मन मे कुछ निशचय कर उठी और अपने पर्स को टटोलने लगी सालगिरह,रिश्तेदारो , माँ आदि द्वारा दिए गये पैसो को जोडने की उसकी आदत रही है। गिनने पर उसके पास कुल 4000 रूपये निकले वह खुशी से चहक उठी और जल्दी-जल्दी  घर से निकल गई इस डर से कि कही माँ टोक न दे।

जब वह घर आई तो उसे देख माँ हैरान रह गई मीरा ने अपने लंबे काले बाल कुतरवा लिए थे बालो की लटे महरून से रंग में रंगा ली थी। उसके हाथ मे कुछ थैलियां जिसे वह माँ से छुपाने मे लगी थी। मां ने जब जबरदस्ती कर थैलियां खोल कर देखा तो उसमे ऊंची हील के सैंडल और स्टाइलिश बैग था। बेटी में अचानक आये इस बदलाव को देखा माँ ने उसे बहुत डांटा इस पर मीरा रोते हुए बोली आजकल सभी लडकियाँ यही सब करती है मेरी सारी सहेलिया मुझ पर हंसती है मै इतना सिंपल रहती हूँ पर आपको उससे क्या कहते हुए वह अपने कमरे मे चली गई।

वह एक कोने मे बैठे बैठे रो रही थी तभी माँ उसके कमरे मे आयी और प्यार से उसके सर पर हाथ फेर कर बोली तूने ये सब इसलिए किया क्योंकि तेरी सहेलियाँ तुझ पर हंसती हैं? मीरा ने हाँ मे सर हिला दिया। माँ बोली पहली बात जो तुझ पर हंसे वो तेरा मित्र  हो ही नही सकता। दूसरी बात कभी भी जिन्दगी मे कोई काम सिर्फ इसलिए मत करना क्योकि सब उसे कर रहे है या दूसरो को वह काम पसंद है , वही करो जो तुम्हे सही लगता हो और तीसरी बात हर इंसान अलग होता है उसकी पंसद नापसंद भी अलग होती है हर कोई इस बात कोई नही समझता पर तुम्हे समझना चाहिए तुम सब जैसी क्यो बन रही हो तुम यदि अलग हो और ऐसे ही रहने मे तुम्हे खुशी मिलती है तो मत बदलो खुद को  ये दुनिया अलग और खास लोगो कोई याद रखती है भीड मे चलने वालो कोई नहीं।

माँ की बातो ने मीरा का नजरिया ही बदल डाला अब वह खुश और बेपरवाह थी।

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