प्यार का दर्द

 Part-1


दोस्तों ये कहानी है ज्योति और दीपक की जिन्हें प्यार हुआ इकरार हुआ और दर्द भी हुआ। कहानी शुरू करने से पहले डिस्क्लेमर देना चाहूंगी कि इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है पर कहानी सत्य घटनाओं पर आधारित है।

ज्योति एक सुंदर छरहरी काया की मालकिन थी। ब्यूटी विथ ब्रेन का सटीक उदाहरण। खूबसूरत एकलौती और पेशे से डॉक्टर एकदम डेडली कॉम्बिनेशन था।
उसके माता पिता छोटे गॉव से थे पर पिता की सरकारी नौकरी थी। पिता ने बहुत लाडो से बेटी को अंग्रेजी मीडियम स्कूल में पढ़ाया। माँ ने भी बेटी को बेटे जैसा पाला हमेशा उसे ये सिखाया अब ज़माना बदल गया है पहले जैसा नही रहा हम तो पढ़े लिखे नहीं थे तो कच्ची उम्र में तुम्हारे पिता से ब्याह दिए गए, पर तुम तो पढ़ रही हो खूब अंग्रेजी भी बोल लेती हो। हम तो तुम्हारी शादी जल्दी नहीं करेंगे तुम खूब पढ़ना और नौकरी करना। तो बस इसी तरह आज़ाद ख़यालो में पलीबढ़ी थी ज्योति। उसने जितना उड़ना चाहा माँबाप ने उतना उड़ने दिया कभी उस पे कोई बंदिशे नही लगाई जिसका नतीजा ये निकला कि वो निहायती ही आत्मविश्वास से भरी हुई रहती , हाज़िर जवाब और हमेशा औरतों को सपोर्ट करती थी।

जब डॉक्टर बनने की बात आई वो ऑर्थो लेना चाहती थी पर घरवालों ने कहा स्त्री रोग सबसे अच्छा रहता है लड़कियों के लिए। तब पहली बार उसे लगा उसके माता पिता इतने भी खुले विचारों के नही है। कैरियर तो कैरियर है इसमें लड़का लड़की कहाँसे आ गया। खैर तब उम्र छोटी थी तो ज़्यादा बहस नही की और बन गयी स्त्री रोग विशेषज्ञ।

धीरे धीरे समय बीता माँ ने कहा बेटी कैरियर तो ठीक है पर अब तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए। पहली बार माँ ने पढ़ाई और कैरियर से हट कर बात कही थी। खैर मैट्रिमोनियल वेबसाइट पे प्रोफाइल बनाई गई और योग्य वर की खोज शुरू हो गयी। डॉक्टर के लिए योग्य वर मतलब डॉक्टर ये तो आप समझ ही गये होंगे ना!! सो ढेर सारे सजातीय और अंतरजातीय लड़को से ज्योति ने मिलना उनको परखना शुरू किया। पर कहीं कोई बात नहीं बनी कोई लालची लगा तो किसी का परिवार रूढ़िवादी लगा।  किसी से विचार मेल नही खाये कुछ को वो नही पसंद आई। 3 साल बीत गए प्रोफाइल बनाये हुए पर शादी के मामले में कोई सफलता नही मिली।

माँ के  हिसाब से 30 साल की जवान अनबियाही लड़की को लोग समाज अच्छी नज़र से नही देखता। ज्योति को हमेशा अपने माँ बाप खुले विचारों के ही लगे थे पर अब कभी कभी उसे लगता है शायद वो गलत थी। कभी कभी उसे ये भी लगता था शायद दुनिया इतनी नहीं बदली जैसे फिल्मो में या इंटरनेट पे दिखाते है। आज भी माँ बाप उल्टिमेटेली बच्चों की शादी और नाती पोते देख कर ही चैन पाते हैं। आज भी दुनिया बिन बियाही लड़की को अच्छी नज़र से नही देखती। कुछ उसे मौका समझते है कुछ लगातार उसके चरित्र पर संदेह करते रहते है। पर इन सब के चलते वो किसी गलत लड़के से तो शादी नही कर लेंगी ना। ऐसा नही है कि उसे शादी नही करनी पर उसे अपनी उस पेशेंट के जैस नही बनना जो घर से इतनी तंग आ गयी थी कि  सुसाइड ही कर लिया। बताती थी कि पति को बेटा चाहिए था मैडम पर बेटी हो गयी, खुश नही है परिवार। एक गलत इंसान एक गलत निर्णय ज़िन्दगी भर का पछतावा। ज्योति का मानना था गलत आदमी से शादी करने से अच्छा कुंवारे रहो।


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Part-2

दिसंबर 2012

उत्तरप्रदेश के कानपुर में एक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया । अलग अलग बीमारियों के विशेषज्ञ अलग अलग बीमारी की जांच कर रहे थे। डॉक्टर ज्योति भी स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में वहाँ आयी।

शिविर काफी भव्य था इसे नेता एक चुनावी दांव के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे थे। देश भर से मीडिया भी इसकी कवरेज करने पहुचा हुआ था और जहां मीडिया वहाँ नेता तो होंगे ही। दीपक जो कि नेता जी का बेटा था और जिसे अगले चुनाव में नेता जी पार्टी के प्रमुख के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे थे उसकी खूब धूम थी।

हर जगह चर्चा थी नेता जी का बेटा अमरीका पढ़ कर आया है। नए भारत को नए युवा नेता की ज़रूरत है। जो सिर्फ उम्र में ही नही सोच में भी युवा हो। ये शिविर एक तरह से उसे ही लांच करने के लिए रखा गया था।

युवा नेता दीपक हर विभाग में जाकर मरीज़ो से मिल रहा था ।  कुछ को ऑपेरशन के लिए  आर्थिक मदद दी किन्ही को आश्वासन दिया । आखिरकार स्त्री रोग विभाग की बारी भी आई जहाँ उसकी नज़र ज्योति पर पड़ी। उसने पीली साड़ी पहनी हुई थी ब्लाउज हल्का गुलाबी। उसके कानों में मोती की बालियां झूम कर उसकी झुल्फों को चूम रही थी। बाल बंधे हुए थे पर शयाद काम की वजह से थोड़े बिखरे गए थे। हाथ मे एक हल्के गुलाबी रंग की स्मार्ट वाच और होंठो पर गुलाबी रंग की लिपस्टिक। उफ्फ ये लड़कियों को गुलाबी रंग इतना पसंद क्यों है बे!!  दो मिनट के लिए वो खो से गया फिर याद आया युवा नेता हैं हम।

उसने पूछा सो मिस.... ???
ज्योति: डॉक्टर....डॉक्टर ज्योति !!
दीपक: जी डॉक्टर ज्योति सो कैसा चल रहा !!
ज्योति: अच्छा चल रहा है सर!! गाव की महिलाओ में जागरूकता कम होती है अपनी हेल्थ के प्रति आप जैसे युवा नेताओं से  यही उम्मीद रहती है कि आप इस आवश्यकता को समझे और इसी तरह के और हेल्थ कैम्प्स का भविष्य में भी आयोजन करें।
दीपक : जी बिल्कुल आप जैसे होनहार डॉक्टर्स का समर्थन रहा तो बिल्कुल आगे भी कैम्पस लगाएंगे! पर एक निवेदन है सर न बोले आप ही के उम्रके के हैं ।

शिविर के अंत मे एक दो फोटो होती है और सब अपने अपने रास्ते चले जाते हैं। शिविर खत्म हो गया पर दीपक के मन से ज्योति का खयाल खत्म नही हो रहा था। पर क्या करें युवा नेता ऐसे ही थोड़े न रोमांस करने लग जाएगा । लड़की ने इशू बना दिया तो! लड़की मान भी गयी तो मीडिया तो छोड़ेगी नहीं!! चुनाव सर पर हैं!! मीठी याद समझ कर भूल जाना ही बेहतर होगा !!

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फरवरी 2013

चुनाव सम्पन्न  हुए और पार्टी ने भारी बहुमत से जीत हासिल की। दीपक की हर जगह प्रशंसा हो रही थी। ढेरो फ़ोन ढेरो मैसेज। उन्हीं ढेरों मैसेज में एक मैसेज डॉक्टर ज्योति का भी था। ज्योति का खयाल दीपक के दिमाग से चला सा गया था पर इस मैसेज ने फिर उस खयाल को ताज़ा कर दिया। पहले उसने सोचा मेसेज का जवाब कॉल करके दे फिर लगा ये शायद ज़्यादा हो जाएगा मैसेज ही कर देता हूं फिर लगा अबे ऐसे चला तो आगे नही बढ़ पाऊंगा फ़ोन ही कर देता हूं। और उसने फ़ोन घुमा दिया ।
उधर से नींद से भरी हुई आवाज़ में ज्योति ने कहा हेलो!! दीपक जी इतनी रात को फ़ोन सब ठीक तो है!!
दीपक की नज़र घड़ी पे पड़ी रात का 1 बज रहा था। जल्दबाज़ी में समय का ध्यान ही नही रहा। क्या सोचेगी ये...कह देता हूं मम्मी की तबियत खराब थी....नही नही आ ही न जाये...क्या कहूं क्या कहूँ...
ज्योति : हेलो दीपक जी !! हेलो कैन यू हेअर मी !!
दीपक: हाँ...हाँ एक्चुअली आपको थैंक्स बोलने के लिए कॉल किया था दिन भर बिजी रहा अभी मैसेज देखा....समय का ध्यान नही रहा...सॉरी आपकी नींद डिस्टर्ब की आप सो जाइये!!
ज्योति: ओह्ह !! कोई नही इट्स ओके बहुत बहुत बधाई जीत की!!
दीपक: थैंक यू
ज्योति: ओके तो मैं फ़ोन रखती हूं।
दीपक : हां हां ज़रूर
ज्योति: ओके बाय
दीपक: बाय!

नींद तो दोनों की उड़ चुकी थी। दीपक सोच रहा था कितनी खूबसूरत आवाज़ है कच्ची नींद में तो और भी अच्छी लग रही थीं । ज्योति सोच रही थी इतना बड़ा नेता है इतने लोगो ने मैसेज भेजे होंगे क्या सच मे ये सबको कॉल करके थैंक्स बोल रहा होगा या सिर्फ मुझे!!

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मार्च 2013

ज्योति का आज जन्मदिन था 34 की होने जा रही थी आज। हॉस्पिटल में  उसके लिए छोटी सी पार्टी रखी गयी थी। संयोंग से उसी दिन दीपक का उनके हॉस्पिटलमें आना हुआ उनकी पार्टी के एक कार्यकर्ता को  कुछ दिन पहले दिल का दौरा पड़ा था और जिस हॉस्पिटल में ज्योति काम करती थी उसी में उनको भर्ती कराया गया था। जब दीपक को पता चला तो उसने सोचा पार्टी के कार्यकर्ता से मिल भी लूंगा और ज्योति से भी मुलाक़ात कर लूंगा!!

जब वो हॉस्पिटल पहुँचा तो पता चला मैडम का बर्थडे है। उसने फौरन एक सोने की चैन मंगवाई और पहुच गया उसके पास।
दीपक: हैप्पी बर्थडे डॉक्टर साहिब!!
ज्योति: ओह्ह थैंक यू दीपक जी। पर इसकी क्या ज़रूरत थी। (उसने चैन के डब्बे की तरफ देखते हुए कहा)।
दीपक: रख लीजिए हर किसी को हम गिफ्ट नही देते।
ज्योति: अच्छा तो फिर हमें क्यो ऐसा क्या है हम में!!
दीपक: आ..व..वो..आप इतनी अच्छी डॉक्टर हैं इसीलिए।
ज्योति: देखिये सर घुमा फिराके बात नही करेंगे पर इतना मेंहगा गिफ्ट हम उसी से ले सकते है जिससे कोई रिश्ता हो आप से तो हम आज दूसरी बार मिल रहे है । आप तो दोस्त भी नही है।
दीपक: तो बना लेते हैं रिश्ता शादी कर लेते हैं।
ज्योति उसे देखती रह गयी ये लड़का सच मे पार्टी प्रमुख है विदेश से पढ़ कर आया है और इस तरह की बातें कर रहा है।
ज्योति : एक मिनट एक मिनट क्या कहा आपने। शादी के लिए एक दूसरे को जानना पड़ता है।
दीपक: देखिये नेता हैं बिजी आदमी हैं इतना टाइम नही है हमारे पास और क्या बुराई है हमारे प्रपोजल में। आधा हिंदुस्तान अरेंज्ड मेर्रिज के नाम पर ऐसे ही शादी करता है। हम 36 के हैं आप 34 की । हम खाते  पीते घर से आप भी सम्मानीय घर से आती है। हम नेता है अच्छे दिखते है आप भी डॉक्टर हैं सुंदर दिखती है हो गया। कल कुंडली घर पर भिजवा दीजियेगा वो भी मिलवा लेंगे। शादी पक्की इतना क्या सोचना।

ज्योति से रहा नही गया और वो ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी। उसे कई लड़को ने प्रोपोज़ किया पर ऐसे किसी ने नहीं किया आज तक। दीपक थोड़ा सा शर्मा गया। हंसी रुकी तो ज्योति ने कहा फ़ोन निकालिये और नोट कीजिये जन्म स्थान कोटा राजस्थान समय सुबह 10 बजे बाकी डेट ऑफ बर्थ तो आपको पता ही है। कुंडली मिल जाये और घरवाले मान जाये तो मेरी तरफ से शादी पक्की।

दीपक की ख़ुशी का ठिकाना न रहा। कुंडली मिलाई 22 गुण भी मिल गए। उसके बाद घरवालों को खबर दी गयी। पहले नेता जी को थोड़ी प्रॉब्लम हुई वो चाहते थे किसी राजनैतिक घराने में बियाह हो पर चलो अब ठीक है ।

ज्योति के घर वाले भी पहले थोड़ा डरे हुए थे राजनैतिक लोगों से रिश्ता जोड़ने में पर चलो अब बच्चो की खुशी के आगे वो भी झुक गए।

बड़ी धूम धाम से दोनों का विवाह संपन्न हुआ। ज्योति ने इतने लड़के देखे परखे पर जब शादी की तो दो बार मिलने के बाद एक अजनबी से। शायद वो उसकी नेता वाली चकाचौध में खो गयी थी या उसे उसकी सादगी पसंद गई या शायद कायनात को उन्हें मिलवाना ही था।

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Part-3


दोस्तों अभी तक आपने पढ़ा ज्योति ने कई लड़के देखने के बाद आखिरकार एक तरीके से अरेंज्ड मेर्रिज कर ली दीपक के साथ। दीपक जिससे वो केवल दो बार मिली थी। तो आपको क्या लगता है ये शादी क्यों हुई? दीपक और ज्योति ने ऐसा क्या देखा एक दूसरे में??
मैं बताती हूँ दीपक ने देखी ज्योति की खूबसूरती उसने सोचा लड़की सुंदर है डॉक्टर है पढ़ी लिखी है। वो था नेता के खानदान से , नेता तो बाद में बने पिता पहले तो बेरोजगार ही थे तो परिवार में जितनी भी महिलाएं थी कुछ खास पढ़ी ना थी । उसने सोचा अब क्योंकि हमारे पास पैसा है सत्ता है तो सुंदर पढ़ी लिखी लड़की से शादी करना हमारी शान को और बढ़ा देंगी। वहीं ज्योति पढ़ी लिखी थी पर पढ़े लिखे तो बाकी डॉक्टर लड़के भी थे जिनको उसने रिजेक्ट कर दिया पैसे भी थे पर इतना पैसा किसी के पास नही था जो दीपक के पास था और न केवल पैसा उसके पास नाम, शान, शोहरत और पावर था।

हमारे देश मे आज भी कई शादियां केवल फ़ोटो परिवार का स्टेटस और पैसा देख कर हो जाती है। लोग बस शादी इसीलिए कर लेते है कि रिश्तेदारों और दोस्तों को दिखा सके मेरी शादी सुंदर अमीर लड़के/लड़की से हुई है। मतलब शादी की बुनियाद ही जब इन छोटी छोटी बातों से तय होती है जो कभी भी जा सकती है तो सोचिए कितना खोखला रह जाता है ये रिश्ता। तो क्या दीपक और ज्योति का ये रिश्ता भी समय के साथ खोखला हो जाएगा और बन के रह जायेगा प्यार का दर्द या फिर समय के साथ समझदारी से दोनों इसको मजबूत बना पाएंगे। जानने के लिए पढ़ें आगे की कहानी।

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शादी तो हो गई । बहुत धूम धाम से। देश के प्रधानमंत्री , बड़े बड़े नेता और बिज़नेस मैन सभी आये थे शादी में। छोटे से परिवार से आने वाली ज्योति ने कभी सपने में भी इतनी रॉयल शादी की कल्पना नही की थी। वो बस बार सारी फोटोज को निहारे जा रही थी। स्टेटस पे डाल कर सबको जला रही थी। अब हॉस्पिटल में भी उसको बहुत तवाजुब मिल रहा था एक बार बोलने पर 20 दिन की छुट्टी अप्रूव हो गयी।

दीपक भी जैसे ही वो कुछ हेल्थी खाने को कहती प्लेट की फ़ोटो खींच कर कहता वेन उ आर मैरिड टू आ डॉक्टर। कुल मिला कर दोनों खुश थे आस पास वालों को जला कर । दोनों मालदीव्स गए हनीमून के लिए। दोनों को लग रहा था जन्नत में मिल गयी हो दोनो को।

20 दिन कैसे बीत गए पता नही चला। 21वे दिन ज्योति हॉस्पिटल जाने को तैयार हुई तो सास ने पूछा किधर जा रही हो?? वो मम्मी हॉस्पिटल!! सकुचा कर ज्योति ने कहा। सास ने कहा ऐसे कपड़े पहन कर??? ध्यान रखो अब तुम हमारे घर की बहू हो गई हो ज़रा हमारी इज़्ज़त का ध्यान रखो । जाओ जाकर ये सिल्क की साड़ी पहनो फिर हॉस्पिटल जाना और ये क्या सोने की बलिया डाली हुई  हैं कान में हीरे के टॉप्स पहनो।

हालांकि सास ने सब पहले से अच्छा और महंगा ही पहनने को बोला पर ज्योति को ना जाने क्यों ये सब अच्छा नही लगा । ऐसा लगा जैसे सास उसकी बेज़्ज़ती कर रही हो। उसे नीचा दिखा रही हो । पर उसने कुछ नही कहा और चुपचाप उनकी बात मान ली।
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2 दिन बाद पिता जी ने दीपक को बुलाया और कहा हमारे घर की बहू हॉस्पिटल में काम करने जाएँ  शोभा नही देता। तुम तो जानते हो डॉक्टर वाली लाइन में हर तरह के केस आते हैं कुछ बिगड़ भी जाते हैं। अगर इसके हाथ से कोई केस बिगड़ा तो सीधा असर हमारे पोलिटिकल कैरियर पर पड़ेगा। अगले दिन खबरे छप जाएंगी नेता जी की बहू ने की इतनी गैर जिम्मेदाराना हरकत। समझाओ उसे! कहो ज़्यादा शौक है तो एक अस्पताल खुलवा देते हैं उसके लिए।  मैनेज करती रहे खुद मरीज़ो का इलाज करने की क्या ज़रूरत। नौकरी दे बाकी डॉक्टर्स को।

रात को दीपक ने जब ये सारी बात ज्योति को बताई। ज्योति एक दम आग बबूला हो गयी। क्या मतलब है लोगो का इलाज नही करू दीपक मुझे मेरा प्रोफेशन पसंद है। तुम्हे पता भी है कितने साल पढ़ाई  की है इसके लिए। मेडिकल में एडमिशन इतना आसान तो नही था। जब सारे फ्रेंड्स मूवी देखने जाते थे मैं कोचिंग में पढ़ रही होती थी। जब सब मेक अप की बातें करते थे मैं किताबोंसे बातें करती थी। पढ़ाई प्रैक्टिस सब मिल कर ज़िन्दगी के 13 साल दिए है इस प्रोफेशन को। मैं क्यों छोड़ू अपना प्रोफेशन । आपको मैं कहूँ पोलोटिक्स छोड़ दो आप छोड़ दोगे!!

दीपक ने कहा देखो मैं समझता हूं तुम्हे अपना काम पसंद है। पर सोचो ज़रा हर डॉक्टर आखिर में क्या चाहता है अपना खुद का हॉस्पिटल या क्लिनिक खोलना। तुम्हे वो बिना मेहनत के मिल रहा है। और ऐसा तो नही तुम्हे मैं घर बैठने को बोल रहा हूं। मान जाओ हॉस्पिटल के लिए। नौकरी क्यों करनी है जब तुम लोगों को नौकरी पे रख सकती हो। डॉक्टर्स का इंटरव्यू लो हॉस्पिटल का प्रमोशन करो। पैसा भी ज़्यादा पावर भी ज़्यादा।

ज्योति ने जब अगली सुबह अपने मम्मी पापा को ये बात बताई उन्होंने ने भी इसे बेहतरीन आईडिया बताया। मम्मी ने कहा देखो बेटा कोई नौकरी क्यों करता है पैसोंके लिए जब तुम्हारे पास वैसे भी पैसा है तो क्यों नौकरी करना। पिता जी ने भी कहा जब आप फेमस हो जाते हो तो लोगो की नज़र तुम्हारी गलती पे रहती है। तुमसे एक केस बिगड़ा तो मीडिया तुम्हे छोड़ेगी नही अरे कभी कभी तो विपक्षी दल वाले जान बूझ कर मुद्दे खड़े कर देंगे तुमने कुछ किया भी नही होगा। खुद का हॉस्पिटल बनाने को बोल रहे हैं 15 साल और लगते तुम्हे कम से कम ये सब करने में। सोचना कैसा ?


पर पापा गलती तो खुद के हॉस्पिटल में भी हो सकती है। पर तुम सीधे तौर से तब इन्वॉल्व नही होगी ना। तुम दूसरे डॉक्टर पे डाल सकती हो। पापा ने जवाब दिया ।

आखिरकार ज्योति मान गयी। एक नई जर्नी की शुरुवात हो रही थी अब वो हॉस्पिटल की  डिज़ाइन मशीनरी वगैरह प्लान और फाइनल करने में व्यस्त हो गयी। आसपास के सभी लोगों को उसके रिश्तेदारों, दोस्तो और साथी डॉक्टर को लग रहा था क्या किस्मत है ज्योति की बिना मेहनत के सब मिल रहा है। पर ये तो ज्योति ही जानती थी उसके अंदर से कुछ टूट सा गया था।


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Part-4


सिंतबर 2013

ज्योति अपने नए घर मे नए तौर तरीकों के साथ अपने नए कैरियर ऑप्शन में बिजी हो जाती है। उसको लगता है सब कह रहे हैं तो यही सही होगा। शायद दुनिया ऐसे ही चलती है।

आज सुबह आईने में देखती है तो लगता है ये वही ज्योति है ? जो पहले हमेशा कॉटन के कम्फ़र्टेबल कपङे फ्लैट चप्पल में रहा करती थी आज सिल्क की साड़ी हील्स वाली सैंडल पहनने लगी है। हीरे की अंगूठी, हीरे के कान के टॉप्स और ये हीरे के पेंडेंट वाली चैन। देख कर लगता है कितनी मोर्डन हो गयी है कितनी बदल सी गयी है। हमेशा काम को लेकर सीरियस रहने वाली लड़की आजकल लोगों के इंटरव्यू ले रही है। सभी कहने लगे हैं तुम तो बिल्कुल बदल गयी , तेरी लाइफ तो सेट हो गयी। जब सब कहते है तो सेट ही हो गयी है मेरी लाइफ । कोई बुराई नही है दीपक के हिसाब से जीने में उल्टा मोर्डन और रिच ही हो गयी हूँ। खैर छोड़ो आज हॉस्पिटल के डॉक्टर्स के इंटरव्यू लेने हैं और ठेकेदार से मिल कर टाइल्स की डिज़ाइन भी फाइनल करनी है समय नही है।

शाम में दीपक पूछता है कैसा रहा आज का दिन। अच्छा था कुछ डॉक्टर्स के इंटरव्यू लिए और देखो ये वाला कलर करवाऊ बिल्डिंग में या ये वाला उसने फ़ोन से दो फ़ोटो दिखाते हुए उससे पूछा। अरे तुम्हारा हॉस्पिटल है जो रंग करना है करो दीपक ने मुस्कुरा कर जवाब दिया। ज्योति खुश हो गयी इतना सपोर्टिव तो है मैं ख़ामख़ा डाउट किये जाती हूँ। तभी दीपक ने पूछा क्या नाम सोचा अस्पताल का?? वी केअर कैसा रहेगा?? ज्योति ने फौरन जवाब दिया ।
नही नही नाम तो अग्रवाल ही होना चाहिए हमारे खानदानका पहला हॉस्पिटल है। तो नाम तो खानदानका ही होना चाहिए। दीपक ने कहा।

ज्योति को खास पसंद तो नही आया ऐसा लग रहा था जैसे किराने की दुकान का नाम हो पर चलो इतना अपने मन से करने दे रहे हैं तो नाम इनके मन का ही सही। इसीलिए उसने कहा बात तो आपकी सही है यही नाम रहेगा।

अच्छा चलो अब सो जाओ कल सुबह मुझे दिल्ली जाना है काम से 3 दिन में लौट कर आऊंगा। दीपक ने कहा।

क्या फिर से जा रहे हो ??? अभी 2 ही दिन पहले तो आये थे। ज्योति ने उदास सुर में कहा।

क्या करें काम ही ऐसा है बिना जाए काम नही बनेगा।

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6 महीने की शादी में ऐसा लगने लगा था मानो 6 साल हो गए हों। दीपक के पास साथ बिताने को समय ही नही था। हमेशा बाहर ही रहते कभी कभी घर रहते भी तो देर रात तक मीटिंग। कभी कहो शॉपिंग करनी है। क्या लेना है साड़ी या घड़ी?? बता दो दुकान वाले को घर पर भिजवा देंगे । हमारे घर की औरतें दुकान या मॉल नहीं जाती समान लेने, सिक्योरटी जान !! समझ सकती हो ना।

ज्योति को वो सफेद बंगला एकदम कैदखाने जैसा लगने लगा था। कहने को सारे आराम थे पर अपनी मर्ज़ी का कुछ भी नही। ना बाजार जा सकते है ना जॉब कर सकते हैं। सास सीधे मुँह बोलती नहीं पतिको  फुरसत नहीं। हाल के दिल सुनाए तो किसको।

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मार्च 2014

ज्योति का शादी के बाद पहला जन्मदिन था। पतिदेव ने दुबई के टिकट्स कराये और कहा साथ रहने का ज़्यादा मौका नही मिलता चलो साथ एंजॉय करेंगे। जिस दिन निकलना था उस दिन कुछ दंगे हो गए दीपक ने कहा जान जाना चाहता था पर क्या करूँ तुम अपनी मम्मी को ले जाओ। मेरी वजह से अपना बर्थडे मत खराब करो।

ज्योति अपनीं मम्मी के साथ दुबई चली गयी। दुबई में किसी विला में रुकने का इंतज़ाम किया गया। काफी अच्छा इंतेज़ाम था । रात 12 बजते ही दीपक का फ़ोन और एक बड़ा सा केक दोनो आ गए। बात करके केक काटने के बाद ज्योति सोने जाने लगी तो माँ ने कहा क्या हुआ ज्योति तुम खुश नहीं लग रही। ज्योति रोने लगी माँ मुझे ऐसा लगता है मैं किसी कैदखाने में हूँ। सब कुछ है पर मेरी मर्ज़ी का कुछ भी नही। ना अपने पसंद के कपड़े पहन सकती हूं न जेवलरी। न कही आ जा सकती हूं आज भी सब कुछ वैसे हो रहा है जैसा वो  चाहता है।  उसके पास रोकने टोकने के लिए बहुत सी बातें है पर साथ बिताने के लिए 1 दिन भी नही।

माँ ने कहा तू इतनी समझदार होकर भी कैसी बातेंकर रही है। अब तू कोई आम आदमी नही वी ई पी हो गयी है। जब शौरहत आती है तो उसकी कुछ कीमत भी तो चुकानी पड़ती है। और दामाद जी ने ये सब तेरे लिए ही तो किया है वो खुद आने वाले थे पर कुछ दंगो के कारण नही आ पाए। पर तु ये सोच उसने तुझे तो जाने दिया वो भी मेरे साथ चाहता तो अपनी माँ को भेज सकता था या फिर भेजता ही नही।

ज्योति को माँ की बातें सुनकर और भी गुस्सा आ गया। यही ना माँ उसने मुझे भेजा तुम्हारे साथ मैं अपनी मर्ज़ी से आई होती तुम्हारे साथ तो बात कुछ और होती।

क्या फर्क पड़ता है बेटा!!

फर्क पड़ता है माँ । ऐसा लगता है वो मेरा पति नही मालिक है जो कहता है जैसा कहता है करते जाओ। उसके बदले में कुछ पैसे और दूसरों की नज़रो में तारीफ मिल जाती है मुझे।

तुझे शादी करने से पहले सोचना था ये सब।  अब वी ई पी से शादीकी है तो थोड़ा समझौता तो करना होगा। वो भी तेरी सिक्योरिटी के लिए रोक टोक करता है। माँ ने कहा।

मेरी सिक्योरिटी नही अपने परिवार की इज़्ज़तअपनी पार्टी की साख के लिए।

जिसके लिए भी हो वो परिवार पार्टी सब तेरी भी है!!

और मेरी खुद की ज़िंदगी मेरी नही है। क्यों माँ!!

तू बावली हो गयी है। ये कह कर माँ उसके सवालों का जवाब दिए बिना ही वहाँ से चली गयी।


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Part-5

 अक्टूबर 2014

अस्पताल बन कर तैयार हो गया था। ज्योति काफी के उत्साहित थी। वो चाहती थी दीवाली पर अस्पताल का उदघाटन हो। पर दीपक ने कहा मार्च में लोकसभा चुनाव आ रहे है। इस बार मै सी एम के पद के लिए खड़ा हो रहा हूँ। सो इस अस्पताल का उदघाटन हम फरवरी में करेंगे ताकि लोगो को ताज़ा ताज़ा याद रहे।

फरवरी 2014

अस्पताल का उदघाटन किया गया बहुत सारे नेता और मीडिया आयी। उद्धघाटन के समय सारी लाइमलाइट दीपक ले गया। शुरू का भाषण उसी ने दिया , भाषण में दुनिया भर की घोषणा कर डाली की गरीबी रेखा से नीचे वालो का मुफ्त इलाज करेंगे, अस्पताल के स्टाफ जैसे सफाई कर्मी , रिसेप्शन पे खड़े लोगों की नौकरी में प्रदेश के मूल निवासियों को प्राथमिकता दी जावेगी। ये सभी घोषणाएं जितनी लोगों के लिए नई थी उतनी ही ज्योति के लिए भी नई थी। उसे इस सब के बारे में कुछ नहीं पता था। मीडिया वाले भी ज्योति से कम दीपक से ज़्यादा इंटरैक्ट कर रहे थे।  सारी मेहनत ज्योति की पर क्रेडिट दीपक ले गया।

ज्योति का जैसे दिल सा टूट गया । ठगासा महसूस कर रही थी वो खुद । घर आने पर जब उसने दीपक से इन घोषणाओं के बारे में पूछा तो उसने कहा अरे कल ही ये निर्णय लिया गया चुनाव प्रचार में इतना बिजी थे तुम्हे बताने का समय ही नही मिला। तुम उदास क्यों होती हो मुख्यमंत्री बन गए तो तुम्हारे लिए एक और हॉस्पिटल खुलवा देंगे। ये जो भी कर रहे हैं तुम्हारे लिए ही तो कर रहे हैं।

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ज्योति धीरे धीरे डिप्रेशन की ओर बढ़ती जा रही थी और किसी को उसकी खबर नही थी। सुबह उठने पर उसे इतनी ख़ुशी नही होती। रात को काफी देर तक नींद नहीं आती। आजकल चॉकलेट बहुत खाने लगी थी कुछ मोटी भी होती जा रही थी। उधर दीपक चुनाव प्रचार में व्यस्त था।

अप्रैल में चुनाव सम्पन्न हुए और वो विजयी हुआ। जीत का जश्न पूरे 7 दिनों तक चला। जब माहौल थोड़ा नार्मल हुआ ज्योति ने दीपक से  बधाई हो आपको आप हमें कितना भागीदार मानते हैं आपकी जीत में।
दीपक ने कहा सब कुछ आपका ही तो है।
ज्योति ने कहा अच्छा कुछ मांगेंगे तो देंगे??
बिल्कुल आपके लिये जान भी हाज़िर है!!
शादी को 2 साल हो गए है अब हमे बच्चा चाहिये। ज्योति ने कहा।
अरे वाह हम भी अपने घर का वारिस लाना चाहते हैं।

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दोनो ने प्रेगनेंसी के लिए ज़रूरी टेस्ट कराये सब ठीक था किसी मे कोई प्रॉब्लम नही। कुछ दिनों बाद ज्योति प्रेग्नेंट हो गयी। सारे घर मे खुशी की लहर दौड़ गयी।  ज्योति भी खुश थी। उसको जैसे जीने के लिए एक नई वजह मिल गयी थी। उसने नाम भी सोच लिए थे लड़की हुई तो स्वर्णा और लड़का हुआ तो जीत। एक बार फिर से उसे सुबह उठने में खुशी होने लगी थी। वो समय से सोती समय पर उठती। सास कभी कभी उसे टोकती ये मत खाया करो वो मत खाया करो, वो बोल देती उनको मम्मी जी मैं एक डॉक्टर हूँ मुझे अच्छी तरह से पता है क्या खाना है क्या नही। वो रोज़ व्यायाम करती सास उसके लिए भी माना करती पर वो नही सुनती। उसको लग रहा था ये एक  चीज़ है जो मेरे शरीर से पैदा हो रही है। इसपे मेरा पूरा हक़ है। इसको दुनिया मे अच्छे से लाना मेरी ज़िम्मेदारी है।

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 प्रेगनेंसी का चौथा महीना था। वो रूटीन चेक उप के लिए  गयी। जब रिपोर्ट आई तो डॉक्टर ने उन्हें बताया है बच्चे में कंप्लीकेशन्स है उसका डेवलपमेंट प्रॉपर नही हो रहा है। आप चाहो तो इसे अबो्र्ट कर दो। 95% ये टेस्ट सही होता है आप खुद भी एक डॉक्टर हैं आप इसे बेहतर समझेगी ।

डॉक्टर तो वो थी पर उससे पहले माँ थी। कोई भी माँ ये आसानी से मनाने को तैयार नही होती कि उसके बच्चे में कुछ प्रॉब्लम है। पर सबके समझानेके बाद उन्होंने उस बच्चे को अबो्र्ट करवाने का फैसला ले लिया।

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अबोर्शन से पहले दीपक और ज्योति दोनो ही काफी दुखी थे। दीपक को  परेशान देख कर उसकी माँ बोली दुखी मत हो बेटा दूसरा बच्चा आ जायेगा। मैंने तो बहु को पहले ही कहा था ये मत खा वो मत खा इतना व्याम मत कर पर उसने मेरी एक न सुनी। उसको तो मैं अनपढ़ लगती हूँ। अपनी ज़िद में अपनी कोख उजाड़ ली। दीपक को न जाने उस वक़्त मां की बात क्यों सही लगी जबकि वो जनता था ज्योति एक डॉक्टर है उसे ज़्यादा पता है। फिर भी कही न कही वो ज्योति को इसका जिम्मेदार मानने लगा।

ओबोर्शन के दिन वो ओबोर्शन होते ही शहर से बाहर चला गया । उससे ज्योति और माँ बाप का दुखी चेहरा देख नही जा रहा था। उधर ज्योति को जब सपोर्ट की ज़रूरत थी उसका पति उसके साथ नहीं था। बच्चा भी खो दिया पति का साथ तो जैसे कभी था ही नही।  चीख चीख कर रोइ वो उस दिन।


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Part-6

ज्योति काफी निराश हो जाती है। वो पहले ही डिप्रेशन से गुज़र रही थी एक उम्मीद की किरण आयी थी उसकी लाइफ में वो भी भगवान ने उससे छीन ली। उधर दीपक का रवैया भी कुछ अच्छा नही था उसकी तरफ। सास और दीपक दोनो ही उसे ज़िम्मेदार ठहरा रहे थे।

हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद ज्योति ने दीपक से कहा मेरा दम घुटता है इस घर मे मैं अपने मायके जाना चाहती हूं।

इस पर दीपक आग बबूला हो उठा। क्या दम घुटता है। ज़मीन से लाकर आसमान पे बैठा दिया। इतनी आलीशान ज़िन्दगी दी तुम्हे खुद का हॉस्पिटल, गहने ,मेंहगे कपड़े इसके बाद भी तुम कभी खुश नही रही और आज जब एक खुशी मेरी ज़िंदगी मे आयी अपने स्वार्थी पन की वजह से तुमने उसे भी मुझसे छीन लिया।

क्या कहा मैने छीन लिया मैन कैसे छीना ?? तुम्हे पता है ना डॉक्टर ने क्या कहा था?? बरर्राये हुए स्वर में ज्योति ने कहा।

हाँ सब पता है। लेकिन मैं ये भी जनता हूँ विज्ञान कितना भी आगे बढ़ जाये कुछ बातें पुराने लोगो की भी सुन लेनी चाहिए क्योंकि उनके पास तजुर्बा होता है। माँ ने कितना मना किया तुम्हे ये मत खाओ ज़्यादा उछल कूद मत करो लेकिन तुमने एक नही सुनी। पढ़ी लिखी लड़कियों की यही प्रॉब्लम है दो किताबें क्या पढ़ ली सबको मूर्ख समझने लगती है। दीपक ने एक सांस में सब बोल दिया।

तुम्हारी माँ नही पढ़ी तुम तो पढ़े लिखे हो मुझे लगा था तुम तो समझोगे पर भूल हो गयी जो नेताओं से भावनाओं की उम्मीद रख ली। तुम लोगों का तो काम ही जनता को बेवकूफ़ बनाना। और क्या कह रहे थे आलीशान ज़िन्दगी दे दी तुमने?? कौन सी आलीशान ज़िन्दगी दम घुटता है मेरा यहाँ ऐसा लगता है एक पिंजड़े में बंद कर दिया हो मुझे। नही चाहिए तुम्हारा पैसा मुझे जीने दो। हाथ जोड़कर ज्योति ने कहा।

जब बहुत सारा पैसा यूही बिना मेहनत मिल जाये तब ये कहना आसान होता है मुझे पैसा नही चाहिए। तुम जो ज़िन्दगी जी रही हो न लोग तरसते हैं वैसी ज़िन्दगी जीने के लिए। दीपक ने कहा।

मैं तो चाहती हूं जैसी ज़िन्दगी मैं जी रही हु मेरे दुश्मन को भी न मिले। इतना कह कर ज्योति अपना सूटकेस पैक करती और टैक्सी करके अपने माँ बाप के घर चली जाती है।

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जब इस बात की खबर दीपक के पिता को लगती है तब वो दीपक को समझाते हैं , "देखो बेटा मैं समझ सकता हूँ तुम बच्चे की वजह से दुखी हो। पर ऐसा तो नही तुम दोबारा बाप नहीं बन सकते । बच्चे का क्या है दोबारा हो जाएगा लेकिन बहु को तुम्हे ऐसे नही जाने देना चाहिए था। कल को वो मीडिया में चली गयी तो पार्टी की और तुम्हारी छवि धूमिल हो सकती है। इसीलिए उससे मना कर के घर ले आओ। "

उधर ज्योति की माँ भी उसे समझाती है मैं समझ सकती हूं तुम बच्चे की वजह से दुखी हो। पर ऐसा तो नहीं दीपक को दुख नही होगा। बोल दिया होगा गुस्से में पर घर वापस चली  जाओ । बच्चे का क्या है दोबारा हो जाएगा।पर ज्योति कुछ समझना नही चाहती थी।

उसने कहा माँ पता है प्रॉब्लम क्या है हमें पता ही नही हमें क्या चाहिए हम बस दूसरों को कॉपी करने में लगे हैं । इंजीनियर बन जाओ डॉक्टर बन जाओ क्योंकि सब कर रहे हैं। शादी कर लो क्योंकि सब कर रहे हैं। अमीर बन जाओ क्योंकि सब बन रहे हैं। बच्चा कर लो क्योंकि सब कर रहे हैं और अब घर वापस चली जाओ क्योंकि शादी के बाद सब वहीं रहते हैं। कब तक मैं अपनी लाइफ के निर्णय दुसरो को देख कर लूंगी। अब बस बहुत हुआ मैं कहीं नही जा रही । नही चाहिए मुझे ऐसा पैसा जो मेरी आज़ादी छीन ले। नही चाहिए मुझे ऐसा पति जिसके पास मेरे लिए समय ही नहीं।

तभी दरवाज़े की घंटी बजती है। माँ जाकर दरवाज़ा खोलती है तो दीपक आया हुआ होता है। माँ उसे देख कर बहुत खुश हो जाती है। अरे ज्योति दामाद जी आये हैं!!

दीपक ज्योति को घर वापस चलने को कहता। आई एम सॉरी ज्योति आई नो तुम काफी दुखी थी हमने अपना बच्चा खोया है । आई शुड हैव स्टूड विथ यु। पर मैं खुद भी बहुत दुखी था। गुस्से में कुछ भी बोल दिया चलो घर चलो। 

ज्योति जाना तो नहीं चाहती थी पर माँ बाप यही चाहते थे कि वो चली जाए दीपक की सॉरी ने भी उसे एक उम्मीद दी इसीलिए वो चलने को रेडी हो जाती है। उधर दीपक कुछ सॉरी तो फील कर रहा था पर ज़्यादा डर उसे मीडिया में बात जाने का था। दोनों ही घर आ रहे थे पर दोनों ही अंदर से कुछ टूट  से गये थे। कहते हैं ना शीशे में एक बार दरार आ जाये तो उसे जोड़ना मुश्किल हो जाता है।


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Part-7

ज्योति दीपक अब साथ तो सोते पर अब उनमें पति पत्नी जैसा कुछ भी नही था । शारीरिक भावनात्मक संबंध जैसे खत्म से हो गए थे। ज्योति दीपक समाज के सामने पति पत्नी जैसे पेश आते घर आ आकर दोनों अपने अपने मोबाइल में खो जाते। दोनों के बीच दूरी शायद 5 मीटर की भी न होती फिर भी दोनों के बीच मीलों का फासला था। 


कभी कभी शुरू शुरू में ज्योति बात करने को कहती कभी कभी दीपक साथ घूमने चलने को कहता पर हर वक़्त किसी न किसी बात को लेकर लड़ाई हो जाती। अब दोनों ने ही चुपी साध ली थी। और इस हक़ीक़त को मान लिया था के शायद वो एक दूसरे के लिए बने ही नही है।


दीपक अपने पोलिटिकल कैरियर में मग्न रहने लगा। ज्योति भी हॉस्पिटल में जाने लगी। कभी कभी दोनों अपनी अपनी प्रोफेशनल बातें शेयर कर लेते थे। मतलब रिश्ता कुल मिला कर एस आ फ्रेंड बन गया था। ऊपर ऊपर की बातें की साथ रहे खाये पार्टी की पर अंदर की गहरी बातें कोई नही करता था।


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ज्योति आज सुबह राउंड्स पे थी । सो डॉक्टर गुप्ता हाऊ इस पेशेंट?? मैम बेटर! 

गुड़ हु इस ही??

मेम डॉक्टर शशांक मेहरा लास्ट वीक ही हॉस्पिटल जॉइन किया है??

ओके सो हाऊ इस इट गोइंग ?? क्या सीखा आपने अब तक?

शशांक बस उसे देखता रह गया। जैसा फिल्मो में होता है ना एकदम से सब सुनाई देना बंद हो गया था। सब कुछ दिखाई देना बंद हो गया। बस उसका चेहरा दिख रहा था। 

मिस्टर शशांक आई एम टॉकिंग टू यू??

जब डॉक्टर गुप्ता ने ये देखा शशांक को ज़ोर से कोहनी मारी और बोला मैडम कुछ पूछ रही हैं।

जी जी मैडम !! शशांक हड़बड़ाते हुए बोल।उसको लगा आज तो गया वो।

पर ज्योति ने उससे सिर्फ इतना ही कहा नए नए आये हैं हॉस्पिटल में बेहतर होगा मन लगा कर काम सीखें।


इतने सालों बाद किसी की आंखों में वो दीवानापन देख रही थी जो हमेशा से वो दीपक की नजर में अपने लिए देखना चाहती थी। अच्छा तो लगा पर क्या फायदा यह सोच कर वो आगे बढ़ गयी।


उधर ज्योति के जाने के बाद डॉक्टर गुप्ता बोले जानते हो वो कौन थी इस हॉस्पिटल की मालकिन और सी एम की बीवी। दिमाग खराब है तुम्हारा नौकरी प्यारी नही क्या??


सॉरी सर वो इतनी खूबसूरती कभी देखी नही। शशांक ने सकपकाते हुए कहा। 


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1 महीने बाद हॉस्पिटल में डॉक्टर्स डे का सेलिब्रेशन था। सभी डॉक्टर्स ने एक छोटी सी हाई टी पार्टी रखी। जिसमे नाश्ते के आइटम्स जैसे समोसा चिप्स पकोड़े चाय इत्यादि थे। ज्योति पीले रंग की साड़ी पहने हुए और गले मे सफेदमोतियों की माला पहने हुए थी। शशांक ने जैसे उसे देखा फिर उसके साथ वही हुआ आस पास की बातें सुनाई देना बंद हो गयी। सारे लोग गुड़ इवनिंग मैम बोल रहे थे और वो एक जगह खड़े हो कर बाद उसे देख रहा था। ज्योति ने उससे बोला सो मिस्टर डे ड्रीमर  आप विश नहीं करेंगे?  


सॉरी मैम गुड़ गुड़ इवनिंग मैम। हड़बड़ाते हुए वो बोला।


सभी उसकी तरफ देख कर हसने लगे।


प्रोग्राम की शुरुवात में ज्योति ने एक स्पीच दी। उसके बाद कुछ और लोगो की स्पीच के बाद ओपन माइक कर दिया जिससे जो कहना है कह सकता है। सभी ने सिफारिश की मेम डॉक्टर शशांक बहुत अच्छा गाते है प्लीज गाइये ना। 

हां हां डॉक्टर शशांक गाएंगे। कुछ लोग सच मे तारीफ कर रहे थे तो कुछ लोग मज़े ले रहे थे। काफी मनोहार के बाद शशांक गाना गाने को तैयार हो गया। 


रहना तू

है जैसा तू

थोड़ा सा दर्द तू

थोड़ा सुकून


रहना तू

है जैसा तू

धीमा धीमा झोंका

या फिर जुनून

थोड़ा सा रेशम

तू हमदम

थोड़ा सा खुरदुरा

कभी तो अड़ जा

या लड़ जा

या खुशबु से भरा

तुझे बदलना न चाहूँ

रत्ती भर भी सनम

बिना सजावट मिलावट

न ज्यादा न ही कम

तुझे चाहूँ जैसा है तू

मुझे तेरी बारिश में भीगना है घुल जाना है

तुझे चाहूँ जैसा है तू

मुझे तेरी लपट में जलना राख हो जाना है


जब उसने गाना शुरू किया उसकी आवाज़ इतनी सुरीली थी कि ज्योति उसकी आवाज़ में खो गयी। वो बस ज्योति को देख कर गायेजा रहा था। ज्योति भी लबो पे मुस्कान लिए उसकी तरफ देखे जा रही थी। उसके गाने में खो सी गयी थी। दोनों को ऐसा लग रहा था उस समय भीड़ होने के बावजूद जैसे वो दोनो तन्हा हो। दोंनो का ध्यान लोगो को तालियों की गड़गड़ाहट से टूटा।


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उस रात ज्योति को नींद नही आई। बार बार उसकी नज़रो के सामने शशांक का चेहरा घूम रहा था । कानो में उसकी आवाज़ गूंज रही थी और ज़ेहन में एक ही ख्याल दीपक और मैं कितने पास हैं एक ही बिस्तर पे सो रहे है पर ऐसा लगता है जैसे हम दोनों के बीच कितना शोर है कितनी भीड़ हैं। जबकि आज मेरे और शशांक के बीच कितनी भीड़ थी पर ऐसा लग रहा था जैसे उस पल हम दोनों अकेले थे। 

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Part-8

हॉस्पिटल में एक बड़ा कठिन सा केस आया एक 12 साल की छोटी बच्ची का 7 लोगोंने मिल कर चलती कार में गैंग रेप किया। बच्ची के शरीर से बहुत सा खून बह चुका था। फिजिकल इंजुरीज़ के अलावा बच्ची मेन्टल ट्रॉमा में भी थी। जब तक बच्ची को हॉस्पिटल लाया गया बात मीडिया तक पहुँच चुकी थी। दीपक ने ज्योति से कहा तुम पर्सनली इस केस को मॉनिटर करो क्योंकि वैसे भी इस केस के चक्कर मे मेरी पार्टी और मेरे नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं। अगर तुम खुद वहाँ मौजूद रह कर बच्ची को बचाने में कामियाब हो गयी तो मेरी इमेज को ठीक किया जा सकता है। मीडिया में खबर जाएगी मुख्य मंत्री को जैसे ही  पता चला उन्होंने फ़ौरन अपने हॉस्पिटल में उसका मुफ्त इलाज कराया । मुख्य मंत्री की धर्म पत्नी स्वयम इलाज के दौरान वह मौजूद रही। प्लीज ये बहुत इम्पोर्टेन्ट केस है ध्यान रखना कोई गड़बड़ ना हो। ज्योति मान गयी और फौरन हॉस्पिटल की ओर रवाना हो गयी।

जो टीम उस बच्ची का केस हैंडल कर रही थी उसमें डॉक्टर शशांक भी था। केस काफी क्रिटिकल था। मीडिया और उसका पति दीपक दोनो ही उस केस पर आंखे गड़ाए बैठे थे। दीपक बारबार मैसेज करके केस की अपडेट मांग रहा था। हॉस्पिटल के बाहर मीडिया का जमावड़ा लगा हुआ था। कुछ लोग प्रदर्शन भी कर रहे थे। इस बीच लड़की की माँ का रो रो कर बुरा हाल था।
ज्योति काफी टेन्स थी। शशांक उसकी हिम्मत बढ़ा रहा था। इजाल के दौरान ज्योति ने देखा शशांक काफी अच्छा डॉक्टर है। काफी नॉलेज रखता है। आखिरकार बच्ची को बचाने में वो सफल हो गयी।

दीपक खुशी से झूम उठा। हॉस्पिटल आ कर उसने बच्ची का हाल जाना फिर बाहर खड़ी मीडिया को संबोधित करते हुए बयान देने लगा " देखिए, अभी अभी मैं बच्ची से मिल कर  आ रहा हूं। बच्ची अभी  खतरे से बाहर है पर बच्ची को इस सदमे से उबरने में थोड़ा वक्त लगेगा परंतु मैं आपसे यह कहना चाहूंगा हमारे प्रदेश में इस तरीके की घटनाओं को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा दोषियों को 2 दिन के अंदर में पकड़ कर आप सबके सामने लाऊंगा । फिलहाल बच्ची का इलाज हमारे अस्पताल में मुफ्त किया गया है और मेरी धर्मपत्नी पूरे समय स्वयं बच्ची के साथ इलाज के दौरान मौजूद रही हैं मेरी धर्मपत्नी स्वयं महिला होते हुए उसके दुख से और हालात से काफी आहत हुई है। मैंने उन्हें भी वचन दिया है की चिंता मत कीजिए हमारे प्रदेश में लड़कियों पर यह अत्याचार कतई सहन नहीं किया जाएगा।"

अपने बयान के बाद दीपक ज्योति के साथ अस्पताल के अंदर जाता है और उसके दोनों हाथों को पड़कर उसे चूमते हुए कहता है थैंक यू सो मच ज्योति तुमने आज मेरी और मेरी पार्टी की इज्जत रख ली। इतना कहने के बाद वह आगे निकल जाता है पार्टी के काम और इस केस के आरोपियों से जुड़े कामों को निपटाने के लिए|

उधर ज्योति भी केस की बारीकी के कारण काफी मेंटल स्ट्रेस में थी और थक चुकी थी इसके बाद वह भी अपने घर चली जाती है । घर पहुंच कर वह बस बिस्तर पर लेटी ही थी कि उसके फोन पर एक मैसेज फ्लैश करता है जो कि शशांक का होता है मैम वेल डन एंड कंग्रॅजुलेशंस।

ज्योति:थैंक यू और कंग्रॅजुलेशन टू यू डॉक्टर शशांक

शशांक:काफी थक गई होगी आप रेस्ट कीजिए

ज्योति:हां तक तो गई हूं बट थैंक्स आपने बहुत हिम्मत
बढ़ाई मेरी।

शशांक :गुड नाइट

ज्योति: गुड नाइट !

अगले दिन सुबह जब ज्योति उठाती है तो उसके फोन पर एक मैसेज आया हुआ होता है शशांक पूछ रहा था गुड मॉर्निंग होप आज आप अच्छा महसूस कर रही होगी।
ज्योति: या मच बेटर गुड मॉर्निंग
शशांक का फॉरेन मैसेज आ गया ओ सो यू आर ए लेट राइजर इट्स ऑलरेडी इन 10 ओ'क्लॉक
ज्योति: आप क्या फोन लेकर ही बैठे थे आप कितने बजे उठते हैं?
शशांक:भाई अब हम थोड़ी ना आपके जैसे  हॉस्पिटल के मालिक हैं हमको तो जल्दी ही उठाना पड़ता है अस्पताल जो आना है। वैसे आज आप आ रहे हो ना हॉस्पिटल??
ज्योति:देखती हूं शायद नहीं घर पर कुछ काम है।
शशांक: ओ मतलब आज का दिन तो बेकार ही जाएगा।
ज्योति: मुस्कुराते हुए क्या मतलब ??
शशांक: कुछ नहीं योर हसबैंड इस रियली लकी टू हैव सच ए सपोर्टिंग वाइफ।
ज्योति मन ही मन सोचती है कि हस्बैंड को शायद ये नहीं लगता पर क्या बोलती इसलिए एक स्माइल बना दी।

शशांक हर सुबह उसे गुड मॉर्निंग भेजता और हर रात को गुड नाइट का मैसेज जरूर भेजता और इसी गुड मॉर्निंग और गुड नाइट के बीच में थोड़ी बहुत दोनों की बात भी हो जाती।

धीरे-धीरे ज्योति को भी उसके मैसेज उसकी आदत सी हो गई अगर शशांक का मैसेज नहीं आता ज्योति उसे मैसेज कर देती। अब वह अस्पताल भी ज्यादा जाने लगी थी जिससे वह शशांक से मिल पाए।

दो-तीन महीने यूं ही चला उसके बाद एक दिन शशांक ने बताया कि कल उसका जन्मदिन है और वह फैमिली को बहुत मिस कर रहा है पर यहां पर काफी इंपोर्टेंट काम है इसलिए घर नहीं जा पा रहा। ज्योति ने सोचा क्यों ना इसके बर्थडे के लिए कुछ स्पेशल किया जाए । उसका मन तो हॉस्पिटल के स्टाफ को बुला कर सरप्राइज़ पार्टी देने का था पर फिर उसे लगा कि कोई क्या कहेगा हर डॉक्टर के लिए तो मैं सरप्राइज पार्टी प्लान नहीं कर सकती। काफी सोचने के बाद उसने प्लान बनाया क्योंकि शशांक राजस्थान से था तो उसने अपने हाथों से उसके लिए दाल बाटी चूरमा के लड्डू बनाए और उसे पैक करके शशांक के घर पहुंच गई उसे बिना बताए। जब उसने डोर बेल रिंग की तो शशांक ने केवल टॉवल लपेटे हुए दरवाजा खोला। वो अचानक से शशांक को शर्टलेस देख कर थोडा शर्मा गई शशांक भी घबरा गया।   मैडम आप बैठिए मैं अभी आता हूं बोलता हुआ  जल्दी जल्दी अपने कमरे में चला गया और थोड़ी ही देर में कपड़े पहनकर बाहर आया और बोला आप घर कैसे और आपको एड्रेस कैसे मिला??
ज्योति ने बोला हर एम्पलाई का एड्रेस आई थिंक रिकॉर्ड में रहता है राइट एनीवेज हैप्पी बर्थडे यह कहते हुए उसने खाने का डब्बा उसकी ओर बढ़ाया। व्हाट इस दिस उसने खोला तो उसमें दाल बाटी चूरमा निकला देखकर शशांक बहुत खुश हो गया और जल्दी से एक बाइट ली ।हम्म्म... अमेजिंग बहुत ही यम्मी है।
ज्योति ने कहा मैंने खुद बनाया है खास तुम्हारे लिए फैमिली को मिस कर रहे थे ना!
थैंक यू थैंक यू सो मच और दोनों साथ में डिनर करते हैं।

ये मिलना जुलना मैसेज का सिलसिला लगभग 1 साल चला और आखिरकार शशांक ने ज्योति से पूछ लिया डू यू लव मी। सवाल बहुत सीधा सा था और जवाब भी बिल्कुल सीधा सा येस ई डू पर उसको कह पाना खास कर एक शादीशुदा औरत के लिए बहुत मुश्किल था ज्योति शशांक का सवाल सुन कर सक्पका सी गई और बिना कोई जवाब दिए ही वहां से निकल गई |


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Part-9

घर आने के बाद ज्योति पूरी रात सो नहीं पाती एक तरफ दीपक है जो आज रात भी घर से गायब है एक तरफ शशांक है जो उसकी छोटी से छोटी पसंद का इतना ख्याल रखता है ।एक तरफ मां-बाप की इज्जत दूसरी तरफ पॉलिटिकल फैमिली की इज्जत। लोग क्या कहेंगे का सवाल और एक तरफ प्यार। ज्योति रात भर सोचती है अगर वह शशांक के साथ जाती है तो क्या दीपक उसे तलाक आसानी से दे देगा ?? उसकी पॉलिटिकल फैमिली की नाक नहीं कट जाएगी ??अगर वह दीपक के साथ रहती है तो वह क्या जिंदगी भर खुश रह पाएगी ??इसकी क्या गारंटी है की शादी के बाद शशांक भी दीपक की तरह बदल नहीं जाएगा?? यह तमाम सवाल उसके दिमाग में रात भर चलते रहे सुबह 7:00 बजे शशांक का हमेशा की तरह गुड मॉर्निंग का मैसेज आया ज्योति को जैसे इस मैसेज का हमेशा इंतजार रहता है और आज तो कुछ ज्यादा ही।

ज्योति ने गुडमॉर्निंग  के रिप्लाई में शशांक को एक लंबा सा मैसेज टाइप किया देखो शशांक मैंने हमेशा तुम्हें एक अच्छा दोस्त एक होनहार डॉक्टर और एक मेहनती एम्पलाई माना है मैं तुम्हारे साथ घूमती फिरती हूं बातें करती हूं इसका तुम कुछ अलग ही मतलब ले गए हो मैं एक शादीशुदा औरत हूं और उम्र में भी तुमसे करीब 8 साल बड़ी हूं। तुम्हारे दिमाग में यह सब कुछ जो चल रहा है उसे यहीं खत्म कर दो यही अच्छा होगा ।

शशांक: अरे मैं तो बस मजाक कर रहा था आप शायद सीरियस हो गई! यह कहकर उसने स्माइली वाली इमोजी भेज दी ।

पर उसे दिन के बाद से ज्योति और शशांक के बीच में सब कुछ नॉर्मल नहीं था ज्योति अब शशांक से थोड़ी दूरी बनाने लगी थी उसे शशांक आज भी पसंद था पर वो ये जानती थी वो शादीशुदा है और ये सब (एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर)उसके लिए पाप समान था। वही शाशांक को पूरा भरोसा था एक न एक दिन ज्योति मान जाएगी उसे यकीन था वो उससे प्यार करती है पर शादी शुदा होने के कारण एक्सेप्ट नहीं कर पा रही है। इसीलिए वो पहले की तरह ही उसके पीछे-पीछे घूमता रहता था।

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इस घटना को अभी महज़ दो ही महीने बीते थे की दीपक का एक वीडियो वायरल हो गया जिसमें वह एक लड़की के साथ आपत्तिजनक हालत में पाया गया।वह लड़की मीडिया के सामने रो-रो कर बयान दे रही थी कि दीपक ने नौकरी का झांसा देकर उसका  फायदा उठाया।
सुबह जब ज्योति ने अपना मोबाइल देखा तो हर जगह यही न्यूज़ चल रही थी उसने दीपक से पूछा यह सब क्या है ??

दीपक ने कहा देखो मैं तुमसे झूठ नहीं बोलूंगा हां वह वीडियो मेरा ही है पर वह लड़की बिल्कुल झूठ बोल रही है कि मैं उसका फायदा उठाया वह खुद अपनी मर्जी से मेरे साथ सोने को तैयार हुई थी ।मैं निर्दोष हूं !

इतना सुनते ही ज्योति का माथा जोर से ठनका और उसने एक जोरदार थप्पड़ दीपक के गाल पर दे मारा। उसने कहा निर्दोष हो ???क्या एक शादीशुदा मर्द दूसरी औरत के साथ सोए इसे दोषी नहीं कहा जाता ??

दीपक: देखो मैं जानता हूं तुम हर्ट हुई हो पर मेरा प्रोफेशन ही ऐसा है यहां पर यह सब चलता है। दूसरों के काम करवाने पर कुछ लोग कैश देते हैं कुछ लोग सोना कुछ लोग जमीन तो कुछ लोग लड़की अब मेहनत करता हूं तो फीस तो लेनी ही पड़ती है ना। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं तुमसे प्यार नहीं करता ।मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं। किसी के साथ सोने से तुम्हारा पति उसका नहीं हो जाएगा।

ज्योति को उसकी बात सुन कर उससे घिन आ रही थी।

दीपक: देखो ज्योति मैं चाहता तो तुमसे झूठ भी बोल सकता था और इन सारे इल्जाम को नकार सकता था पर तुम मेरी पार्टनर हो इसलिए मैंने तुम्हें सब सच बताना ही उचित समझा। अब प्लीज मीडिया के सामने तुम भी मेरा साथ दे देना और कोई तमाशा मत खड़ा करना।

ज्योति: मीडिया मीडिया मीडिया इस दैट ऑल  यू केयर अबाउट। मेरा क्या कितनी आसानी से कह दिया तुमने की बस सोया ही था किसी और के साथ और कुछ नहीं प्यार तो तुमसे ही है पर अगर यही काम मैंने किया होता तब भी क्या तुम मुझे माफ कर देते।

दीपक: देखो ज्योति तुम्हें भी पता है हमारे बीच में कुछ समय से कुछ खास अच्छा चल नहीं रहा है हम मुश्किल से ही एक दूसरे के साथ वक्त बिताते हैं तो बहक गया यार मैं । मुझे पता है गलती की है मैंने ।आई एम सॉरी मैं बदल जाऊंगा एक मौका और तुम मुझे प्लीज।

ज्योति गुस्से में वहां से निकल जाती है और दूसरे कमरे में जाकर दरवाजा बंद करके फुट-फुट के रोती है। क्या मिला दीपक से शादी करके तनहाई और धोखा। धोखा तो मैं भी दे सकती थी ऑप्शंस तो मेरे पास भी थे ।मैं भी चाहती तो शशांक के साथ अफेयर कर सकती थी पर नहीं मैं इस इंसान के लिए लॉयल रही और बदले में इसने मुझे क्या दिया।

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मामले ने बवाल इतना मचाया कि आखिरकार लड़की की एफ आई आर पर दीपक को गिरफ्तार कर लिया गया। जब पुलिस उसे ले जा रही थी तो उसने ज्योति के आगे हाथ जोड़कर बोला प्लीज मीडिया के सामने मेरे साथ ही खड़ी रहना नहीं तो सबको लगेगा कि तुम भी मुझे दोषी मानती हो । ज्योति रोबोट की तरह दीपक की बात मानते हुए उसके साथ चल दी उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था और कर भी क्या सकती है। जैसे ही दीपक और ज्योति घर से बाहर आए मीडिया उनसे तरह-तरह के सवाल करने लगी। ज्योति से भी मीडिया ने सवाल किया आपको क्या लगता है आपके पति निर्दोष हैं?? क्या आप अपने पति का अभी भी साथ देती हैं ?? ज्योति ने सिर्फ इतना ही कहा देखिए मामला कोर्ट में जाएगा तो सच अपनेआप सामने आ जाएगा।  और कह भी क्या सकती थी उसका दिमाग ही काम नहीं कर रहा था। उसके दोस्त उसके रिश्तेदार सब उसके बारे में अब क्या सोच रहे होंगे की गई थी बड़ी डॉक्टर बन के सी एम से शादी करने पति ने ऐसे कांड किए।  उसके मां-बाप पर क्या गुजर रही होगी। पति पत्नी का रिश्ता मर चुका था पता था उसे पर बेवफाई की तो गुंजाइश नहीं थी अब भी उसमें।

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इधर जब शशांक को यह सब पता चला तो उसने कई बार ज्योति को कॉल किए पर ज्योति उसका फोन इग्नोर कर रही थी। इस बीच  धीरे-धीरे उसकी पति के अय्याशी के और कारनामे सामने आने लगे और ज्योति पूरी तरीके से टूट गई। एक शाम वो जाकर एक बार में बैठी थी उसको समझ नहीं आ रहा था अब यहां से वह आगे कहां जाएं क्या करें । उसी समय शशांक उसके सामने आकर के खड़ा हो गया सो तुम यहां हो कितने कॉल किए मैंने पिक क्यों नहीं किए??

ज्योति: क्यों कर रहे हो कॉल तुम मुझे?? मजे ले रहे होंगे ना कि देखो मुझे ठुकराया अपने पति के लिए और क्या मिला बेवफाई ??हंस लो मेरी सिचुएशन पर तुम भी।

शशांक: लिसन प्यार करता हूं तुमसे हसूंगा नहीं तुम्हारी बर्बादी पर मुझे अंदाजा है कि तुम पर क्या गुजर रही होगी।

शशांक की बात सुनकर ज्योति फूट-फूट कर रोने लगती है शशांक मौके का फायदा उठाकर उसे गले से लगा लेता है और उसे कहता है देखो मुझे पता है यह सही टाइम तो नहीं है पर अभी मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं अब भी तुम अपने बेवफा पति को छोड़कर एक नई जिंदगी शुरू कर सकती हो मेरे साथ।

ज्योति एक असहाय बच्चे की तरह उसकी तरफ देखती है। जब हर तरफ मुसीबत ही मुसीबत धोखा ही धोखा दिखता है तो समय कोई प्यार से बात भर कर ले तो हमें उससे ज्यादा अपना कोई दूसरा नहीं लगता। ज्योति के साथ भी अभी वैसा ही हो रहा था उसे शशांक एक उम्मीद की तरह दिख रहा था जिसपे वह चाह कर भी शक नही कर पा रही थी। वह उससे लिपट जाती है । शशांक उसके होठों को चूमने लगता है और वह भी उसे रोकती नहीं।


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Part-10

इतने दिनों से ज्योति कशमकश में थी वह आगे क्या करें उसे कुछ भी साफ दिखाई नहीं दे रहा था सब कुछ धुंधला धुंधला सा था। पर आज सब कुछ साफ नजर आ रहा है उसे अपना और शशांक का खुशहाल परिवार नजर आ रहा है। ज्योति ने निर्णय ले लिया था कि अब वह दीपक को तलाक देगी और शशांक के साथ दूसरी शादी करेगी वह यह सब अपने मां-बाप को भी बता देना चाहती थी परंतु शशांक ने उसे मना कर दिया था। शशांक ने कहा दीपक से तलाक लेना आसान नहीं होगा उसे सिर्फ मीडिया की ही पड़ी रहती है इसलिए हमें घी जो है टेढ़ी उंगली से निकलना पड़ेगा। इसलिए पहले डिवोर्स के पेपर तैयार करवाते हैं और उसके बाद जब दीपक उसे साइन करने के लिए राजी हो जाए तब हम सबको बताएंगे। अगर तुमने पहले किसी को भी बताया और अगर दीपक को इस बात की भनक भी लग गई तो वह सतर्क हो जाएगा । हमें उसके काले कारनामे जिसकी खबर किसी को नहीं है उनका पता लगाना पड़ेगा।  फिर उसको हम ब्लैकमेल करेंगे यहां साइन करो नहीं तो अभी के अभी हम मीडिया को यह सब बता देंगे और जब उसके पास कोई चारा नहीं रहेगा तो मजबूरन पेपर्स पर साइन कर देगा और हम आजाद।
परफेक्ट क्या आइडिया है ज्योति ने शशांक का माथा चूमते हुए कहा।
शशांक: हम्म तो अब लग जाओ काम पर और ढूंढ निकालो उसके राज ।
ज्योति:मैं जानती हूं उसका करीबी सबसे ज्यादा माधव है। माधव से मिलने पर हमें कुछ ना कुछ हासिल जरूर होगा।

ज्योति माधव के पास जाती है और उससे कहती है देखो अपोजिशन चाहती है की दीपक एक के बाद एक इल्जामों से घिरा रहे इसलिए प्लीज मुझे बताओ इसके और कौन से राज हैं जिस पर अपोजिशन उसे घेर सकती है ताकि मैं उन सब के तोड़ निकाल कर दीपक को बचा सकू। इलेक्शन सर पर है हम किसी भी कीमत पर अपनी पार्टी की इमेज खराब नहीं होने दे सकते इस तरीके से।

क्योंकि ज्योति और दीपक मीडिया के सामने हमेशा स्ट्रांग ही रहे हैं तो माधव को ज्योति पर कभी भी डाउट नहीं हुआ और उसने उसे उसके काले कारनामों का चिट्ठा बता दिया। उसने उसके तोड़ भी उसे सुझाए कि अगर चाहे तो ऐसा किया जाने पर हम उसे बचा सकते हैं।

थैंक यू सो मच माधव थैंक यू सो मच कहते हुए ज्योति वहां से निकल आई और तुरंत शशांक के घर पहुंची और उसे सारी बात बताई। शशांक खुशी से चहक उठा "परफेक्ट तुमने तो एक ही दिन में सारे चिट्ठों की लिस्ट निकाल ली । कल सुबह सबसे पहले जाकर मैं वकील से तलाक के पेपर बनवा लेता हूं।"

मैं भी साथ चलूंगी ज्योति ने कहा।"पागल जैसी बातें मत करो किसी को अगर भनक भी लग गई कि तुम उससे तलाक ले रही हो तो गड़बड़ हो जाएगी इसलिए मुझे अकेले जाने दो", शशांक ने कहा।

2 दिन में तलाक के पेपर भी तैयार हो चुके थे अब उन्हे बस दीपक को जमानत मिलने का इंतजार था।

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आखिर वह दिन भी आ गया 10 दिन के बाद आखिरकार दीपक को बेल मिल ही गई। ज्योति बहुत खुश थी उसे पता था दीपक से तलाक लेना आसान तो नहीं होगा पर उसे किसी भी कीमत पर यह करना होगा तभी वह इस कैद से आजाद हो पाएगी और तभी वह अपनी नई जिंदगी शुरू कर पाएगी।

वह इस खुशखबरी को शशांक के साथ बांटना चाहती थी इसलिए उसे बताने में हॉस्पिटल गई और शशांक किसी से फोन पर बात कर रहा था इसलिए ज्योति वहां से लौट आई।

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अगले दिन सुबह दीपक जेल से रिहा  हुआ। पार्टी समर्थक ढोल नगाड़ों के साथ वहां मौजूद थे। खूब जश्न मनाया गया। मीडिया भी वहां मौजूद थी। काफिला आगे बढ़ा  घर की तरफ और इसी काफिले में शामिल किसी सरफिरे ने दीपक पर गोली चला दी और वहीं दीपक की लीला समाप्त हो गई ।चारों तरफ सनसनी फैल गई यह क्या हुआ।

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शशांक ने जैसे यह न्यूज़ देखी उसने ज्योति को मैसेज किया हमारे रास्ते का कांटा साफ हुआ ज्योति ने मैसेज पढ़ने के बाद अपना फोन स्विच ऑफ कर लिया शशांक ने कई फोन लगाएं परंतु बात ना हो सकी। मिलने की भी कोशिश की पर बंगले के बाहर हाई सिक्योरिटी होने के कारण मिल ना सका।उसे लगा शायद बिजी है ड्रामा तो करना ही पड़ेगा ना ज्योति को कि वह दुखी है पर फिर भी वह बेचैन था इतना बड़ा हादसा हो गया और ज्योति ने उससे एक बार भी बात नहीं की।

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2 दिन बाद
शशांक अपने घर पर सो रहा था और किसी ने जोर से उसके दरवाजे पर दस्तक दी उसने आधी नींद में उठकर दरवाजा खोला और सामने से एक जोरदार थप्पड़ उसके गाल पर पड़ा ।उसने देखा सामने पुलिस खड़ी थी पुलिस इंस्पेक्टर ने कहा साले मर्डर करता है और उसे पड़कर पुलिस स्टेशन ले गई। वह पछता  रहा कि मेरा गुनाह क्या है उसे किसी ने कुछ भी नहीं बताया।। पुलिस स्टेशन पहुंचने पर उसे पता चला की ज्योति ने उसके खिलाफ कंप्लेंट की है कि इस इंसान ने मेरे पति को मार डाला।


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Part-11


शशांक को जेल पहुंचने के बाद पता चलता है कि ज्योति ने पुलिस को बताया कि उसके हॉस्पिटल में एक लड़का जिसका नाम शशांक है काम करता है। वह उससे उम्र में 8 वर्ष छोटा है। छोटी उम्र का होने के कारण और चूंकि उसकी फैमिली यहां नहीं थी ज्योति उसे अपना छोटा भाई मानने लगी थी। काम में भी होशियार था। इसलिए उसके साथ अच्छे से पेश आती कभी-कभी खाना वगैरा भी ले जाती थी परंतु उसने उसकी दोस्ती को गलत रूप में लिया और उसके बाद उससे शादी करने की इच्छा जाहिर की। उसने अपने बयान में बोला कि मैंने डॉक्टर शशांक को खुद से दूर रहने के लिए कहा था जो बात शायद से उन्हें नागवार गुजरी। मैं अपने पति से बहुत प्यार करती थी और यही बात शशांक झेल नहीं पा रहे थे । उनको रिजेक्शन मंजूर नहीं था शायद। ज्योति ने बताया की शशांक का पागलपन इतना बढ़ गया था की उसने उसके और दीपक के तलाक के पेपर्स भी तैयार करा लिए थे और उसको फोर्स कर रहा था पेपर साइन करने के लिए। जब मैने उनके फोन उठाना बंद कर दिया उन्होंने मेरे पति का मर्डर कर दिया। मुझे अगर जरा भी अंदेशा होता कि शशांक ऐसा करेगा मैं उससे जरूर फोन पर बात कर लेती या मिल लेती। मैं सोच भी नहीं सकती एक पढ़ा लिखा डॉक्टर ऐसी हैवानियत कर सकता है। ज्योति ने पुलिस को अपनी बात के समर्थन में कई सबूत भी दिए।

पहला सबूत
मेसेज का स्क्रीनशॉट
देखो शशांक मैंने हमेशा तुम्हें एक अच्छा दोस्त एक होनहार डॉक्टर और एक मेहनती एम्पलाई माना है मैं तुम्हारे साथ घूमती फिरती हूं बातें करती हूं इसका तुम कुछ अलग ही मतलब ले गए हो मैं एक शादीशुदा औरत हूं और उम्र में भी तुमसे करीब 8 साल बड़ी हूं। तुम्हारे दिमाग में यह सब कुछ जो चल रहा है उसे यहीं खत्म कर दो यही अच्छा होगा ।

( ये मैसेज तब का था जब उसने पहली बार ज्योति से पूछा था डू यू लव मी)

दूसरा सबूत
शशांक द्वारा किया गया मैसेज हमारे रास्ते का कांटा साफ हुआ (जो की पुलिस अनुसार शशांक ने मर्डर करने के बाद किया)

तीसरा सबूत
वकील और माधव की गवाही ।
वकील ने कहा ज्योति जी अपने पति को बहुत प्यार करती थी और उनकी बेल (ज़मानत) के लिए काफी मेहनत कर रही थी। वे लगातार मेरे टच में थी।
वहीं माधव ने बताया ज्योति अपने पति के लिए पूरी तरह समर्पित थी और उन्हें बचाने के है संभव प्रयास कर रही थी।

चौथा सबूत
हॉस्पिटल स्टाफ की गवाही ।
ज्योति जी पहले शशांक के साथ काफी फ्रेंडली थी पर कुछ दिनों से उनसे दूर रहने लगी थी।
(ये बात तब की है जब ज्योति ने शशांक को मैसेज करके दूर रहने को कहा था और खुद भी कुछ दूरी बना ली थी)

पांचवा सबूत
डाइवोर्स लॉयर की गवाही
शशांक ने जिस लॉयर के साथ मिलकर तलाक़ के पेपर तैयार कराए थे।

छटवां सबूत
शशांक द्वारा किए हुए मिस कॉल की डिटेल्स।
(जो उसने दीपक के जेल जाने के बाद उसे किए थे)

आरोप काफी गंभीर थे और सबूत बहुत से थे। शशांक के वकील ने उससे पूछा आपके पास कोई सबूत हैं। तब उसने ध्यान दिया ज्योति ने शायद ही कभी उसे कोई मेसेज किए हो जिससे ये साबित कर सके की वो उससे प्यार करती थी। वो उससे कभी भी घर या हॉस्पिटल के अलावा  कही और नहीं मिली।काफी ज़ोर देने के बाद उसे याद आया वो ज्योति से आखिरी बार एक ड्रिंक बार में मिला था। उसने अपने वकील को इसकी जानकारी दी। वकील ने जब वहां जाकर उस दिनकी सी सी टी वी फुटेज चेक करनी चाही तो वो ऑलरेडी डिलीट हो चुकी थी।

जब शशांक को ये सब पता चला उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था सीधी सी दिखने वाली ज्योति उसके साथ इतना बड़ा गेम खेल जायेगी।

*******
उधर शहर के मुख्य मंत्री के निधन के उपरांत पार्टी और शहर में हलचल बनी हुई थी। इस बीच ज्योति के ससुर उससे कहते हैं मैं तो अब बूढ़ा हो चला  हूँ जो पार्टी की कमान संभालूं तुम्हें क्या लगता है माधव ठीक रहेगा??

ज्योति कहती है मुझे पता है इंडिरेक्टली आप कहीं न कहीं मुझे भी अपने बेटे की मौत का जिम्मेदार मान रहे हैं। हुआ तो सब मेरी वजह से न मैं उस लड़के से बात करती ना वो मेरे प्यार में पड़ता ना आज ये दिन देखना पड़ता।

ससुर जी कहते है बेटा होनी को कौन टाल सकता है। पर हां मुझे इतना पता है आखिरी समय में तुम उसके साथ खड़ी थी। मेरे लिए इतना ही काफी है।

इस पर ज्योति कहती है अगर आपने मुझे माफ कर दिया तो आज से मैं आपकी बहू नही बेटी हूं। आपने बेटा खोया है पर आपकी बेटी अभी जिंदा है। इसीलिए पार्टी का नेतृत्व मैं करना चाहूंगी। मैं आपके बेटे के अधूरे कामों को पूरा करूंगी।

सास ससुर भी सहर्ष उसके इस प्रस्ताव को स्वीकार लेते है। और चंद ही दिनों में ज्योति नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेती है।

*****
शपथ लेने के बाद ज्योति शशांक से मिलने जेल पहुंचती है।शशांक का उसे देख कर खून खौल उठता है। वो उससे कहता हैं मैं सोच भी नहीं सकता तू इतनी गिरी हुई औरत निकलेगी। मैने तुझे क्या समझा था और तू क्या निकली। सत्ता के लालच में अपने पति को खुद मरवा डाला और इल्जाम मेरे माथे मठ दिया। खुद सी एम बन गई लालची औरत।

क्या कहा तुमने लालची औरत??? ज्योति ने कहा।
लालची मैं या तुम??

क्या मतलब है तुम्हारा ?? शशांक ने पूछा।

ज्योति:मैंने तो तुमसे हमेशा प्यार ही किया था सब कुछ छोड़कर पैसा, सत्ता, पावर ,पति तुम्हारे पास आने ही वाली थी पर जब मुझे तुम्हारे इरादों का पता चला मैंने प्लान बदल दिया।

क .. क..कैसे इरादते?? क.. क...क्या बक रही हो?? हकलाते हुए शशांक ने कहा??

ज्योति: उस दिन जब दीपक को जमानत मिली तो सबसे पहले यह खुशखबरी मैं तुम्हें देना चाहती थी इसलिए उस  दिन मैं खुद हॉस्पिटल आई थी।  पर तुम तो किसी और से फोन पर बात करने में खोए हुए थे।

और क्या कह रहे थे तुम की यार तू गैस कर मुख्यमंत्री की बीवी के हिस्से में कितनी प्रॉपर्टी आएगी हम्म्म ?? .....अरे तू फिकर मत कर मैंने उसको ऐसा फसाया है कि वह मुझे छोड़ कर जा ही नहीं सकती पहले तलाक दिलाऊंगा फिर एल्यूमिनी की डिमांड करवाऊंगा फिर उसके पैसे पर ऐश ही ऐश। ....तंग आ गया हूं मैं भी सुबह 9:00 बजे से रात के 5:00 तक की ड्यूटी करते-करते। ......यू नो इन शादीशुदा औरतों को पटाना बहुत आसान होता है पहले से ही दुखी होती है बस हमको जाकर थोड़ा प्यार से ही बात करनी पड़ती है और ये सब कुछ छोड़-छाड़ कर हमारे पास आने को तैयार हो जाती है।.....लेकिन यह मत सोच कि यह केस इतना आसान था पट तो वह बहुत पहले गई थी पर शादी के लिए राजी करना मुश्किल था पर तेरे भाई ने कर दिखाया। ......बस कुछ महीनो का इंतजार है उसके बाद फाइव स्टार में शादी करूंगा और विदेश जाऊंगा हनीमून के लिए।.....हा हा  हा क्या मतलब हनीमून पहले हो गया होगा ??  चाहता तो कर तो सब लेता किस विस तो कर लिया। लेकिन फिर शादी नहीं करती ना भरोसा भी तो जीतना था उसका। वो सुना होगा न तूने सब्र का फल मीठा होता है बस वही पॉलिसी अपना रहा हूं।

 इतना सुनते ही शशांक शॉक्ड हो गया। उसकी इतनी प्लानिंग पे पानी फिर गया। अब उसे सब साफ साफ समझ आ रहा था।वो मैं... मैं वो ऐसे ही... लड़खाते हुए शशांक ने कहा।

अपने आप को बहुत शाना समझता है ना तू। अब देख मैं क्या करती हु तेरे साथ। तुम मर्दों ने हम औरतों को क्या समझ रखा है ??? पहले वो दीपक मुझे मीडिया के सामने शोपीस की तरह इस्तेमाल करता रहा। उसके लिए मैं बस एक शो ऑफ की चीज़ थी। सोता किसी और के साथ था रहता किसी और के साथ। उसके बाद तू आया जिसके लिए मैं एक चलता फिरता बैंक थी। तेरा रिटायरमेंट प्लान। मैने तो हमेशा प्यार ही किया पर मुझे क्या मिला दर्द सिर्फ दर्द। बहुत दर्द दे लिए तुम दोनों ने अब मेरी बारी ।

सु.. सु... सुनो प्लीज मुझे माफ करदो ई कैन एक्सप्लेन जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ भी नहीं है... लिसेन.... शशांक कहता रह जाता है और ज्योति वहां से चली जाती है।

दीपक का मर्डर करवाने का और शशांक को जेल भेजने का कोई पछतावा नहीं था उसे। हां लेकिन उसे एक पछतावा जरूर था सास ससुर से उनका बेटा छीन लेने का। वो समझ सकती थी उनका गम क्योंकि उसने भी अपना बच्चा खोया था। इसीलिए उसने पॉलिटिक्स ज्वाइन करके उनकी पार्टी को जिंदा रखा। उनके साथ रहने का भी फैसला किया ताकि बुढ़ापे में उन्हे कोई तकलीफ न हो।


                  _____THE END______




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