हां खूबसूरत हो तुम
हां खूबसूरत हो तुम
कहो ये बार बार खुद से
कहो ये खुद से
चेहरा रंग कद काठी सब दिखावा है
ऊपर वाले ने तुम्हे निराला बनाया है
कहो ये तब तलक खुद से
जब तलक तुम्हारा आइना तुम्हे अपना ना ले
हां खूबसूरत हो तुम
कहो ये बार बार खुद से।
कहो ये बार बार खुद से
कहो ये खुद से
चेहरा रंग कद काठी सब दिखावा है
ऊपर वाले ने तुम्हे निराला बनाया है
कहो ये तब तलक खुद से
जब तलक तुम्हारा आइना तुम्हे अपना ना ले
हां खूबसूरत हो तुम
कहो ये बार बार खुद से।
हां खूबसूरत हो तुम
कहो ये बार बार खुद से
कहो ये खुद से
तो क्या हुआ जो बाल कम हो गए
तो क्या हुआ जो कुछ मोटे हम हो गए
तो क्या हुआ जो रंग काला है
तो क्या हुआ जो किसी ने एसिड दे मारा है
तो क्या हुआ जो किसी बीमारी का साया है
कहो ये तब तलक खुद से
जब तलक तुम्हें खुद से प्यार ना हो जाए
हां खूबसूरत हो तुम
कहो ये बार बार खुद से।
कहो ये बार बार खुद से
कहो ये खुद से
तो क्या हुआ जो बाल कम हो गए
तो क्या हुआ जो कुछ मोटे हम हो गए
तो क्या हुआ जो रंग काला है
तो क्या हुआ जो किसी ने एसिड दे मारा है
तो क्या हुआ जो किसी बीमारी का साया है
कहो ये तब तलक खुद से
जब तलक तुम्हें खुद से प्यार ना हो जाए
हां खूबसूरत हो तुम
कहो ये बार बार खुद से।
हां खूबसूरत हो तुम
कहो ये बार बार खुद से
कहो ये उन सब से
जो रंग रूप को लेकर तुम्हे नीचा दिखाते है
कहो ये तब तलक उन सब से
जब तक वो खुद की सोच पर शर्मिंदा ना हो जाएं
हां खूबसूरत हो तुम
कहो ये बार बार खुद से
कहो ये बार बार खुद से
कहो ये उन सब से
जो रंग रूप को लेकर तुम्हे नीचा दिखाते है
कहो ये तब तलक उन सब से
जब तक वो खुद की सोच पर शर्मिंदा ना हो जाएं
हां खूबसूरत हो तुम
कहो ये बार बार खुद से
- संचिता सक्सेना " दर्शिका"
( स्वरचित)
( स्वरचित)
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