एडवेंचर से परिपूर्ण हनीमून


निशांत वर्मा जी के 3 बच्चों में से सबसे बड़े था। निशांत बचपन से ही पढ़ने में ठीक-ठाक ही था । यूं तो वर्मा जी सरकारी दफ्तर में क्लर्क थे परंतु उनके ख्वाब बहुत बड़े थे वे चाहते थे कि उनके बच्चे डॉक्टर इंजीनियर आईएएस ऑफिसर बने पर निशांत की पढ़ाई की प्रोग्रेस देखकर वर्मा जी ने बहुत पहले ही निशांत से कोई उम्मीद करना छोड़ दिया था। निशांत ने भी अपने बाबूजी को कभी गलत साबित करना उचित नहीं समझा और बन गया वह मास्टर प्राइवेट स्कूल में ।
हम भारतीयों को शादी कराने की बहुत जल्दी होती है नौकरी लगी नहीं कि शादी की बातें शुरू। अब भई मध्यमवर्गीय परिवार का लड़का और वह भी स्कूल में मास्टर अच्छी लड़की मिले तो मिले कैसे। घर वाले बड़े परेशान क्या किया जाए पंडितों को बुलाया गया सलाह मशवरा किया गया किसी ने कहा निशांत बाबू की राशि में अभी शनि साढ़ेसाती है किसी ने विभिन्न प्रकार के दान बताएं ।इसी बीच निशांत जी के किसी दोस्त ने उन्हें सरकारी बैंक की पोस्टों के बारे में बताया उन्होंने सोचा शादी तो हो नहीं रही बैंक का फार्म ही भर देते हैं।
फार्म भरा और निशांत बाबू की किस्मत चमक गई पहली ही बार में सिलेक्शन। निशांत बाबू अब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में क्लर्क बन गए थे। सरकारी नौकरी लगते ही शादी के लिए रिश्तों की लाइन  लग गई। जहां निशांत बाबू और उनके घर वाले लड़कियों के लिए तरस रहे थे अब तो उनके घर रिश्तों की बाढ़ सी आ गई। अब सरकारी नौकरी लग गई तो नखरे भी बढ़ गए थे। जिसे ज़िंदगी भर नालायक समझते रहे वो तो होनहार लायक निकल गया। करीब 15 लड़कियों को रिजेक्ट करने के बाद निशांत जी एक लड़की के लिए हां भरी नाम था मीनल।
मीनल थी तो छोटे से कस्बे से परन्तु पढ़ी शहर में रह कर ही थी अपनी बुआ के पास।  शादी हुई हनीमून का प्रोग्राम बना। गोवा जाना तय हुआ। सारी बुकिंग मीनल ने ही की थी। निशांत जी कुएं के मेंढ़क कभी जिले से बाहर कहीं घूमने नहीं गए पहली बार राज्य से बाहर कहीं जा रहे थे वो भी पत्नी जी के साथ वो भी हवाई यात्रा पर। अंदर ही अंदर डरे सहमे से निशांत बाबू पहुंच गए हवाई अड्डे पर। हवाई अड्डा देखते ही वे तो भौचके रह गए। अरे उन्होंने क्या उनके बाप दादा ने भी कभी हवाई अड्डा नहीं देखा था। गेट पर लंबी सी लाइन मीनल बोली सुनिए जल्दी से लाइन में लग जाए फिर अन्दर टिकट भी लेना है और चेक इन भी करना है। निशांत बाबू बोले टिकट क्यों लेना है भाई टिकट तो मैंने पहले ही बुक कर दिया है ये देखो प्रिंट आउट। ओहो आप भी ना टिकट बुक करने के बाद सीट नंबर तो लेना पड़ेगा ना मीनल बोली। निशांत बाबू की कुछ समझ ना आया टिकट लेने के बाद भी लाइन में लग सीट नंबर लेना है तो आदमी टिकट ही क्यों बुक करें। इससे अच्छा तो ट्रेन है ऑनलाइन टिकट बुक कर लो सीट भी कन्फर्म हो जाती है। बेकार में लाइन में नहीं खड़ा होना पड़ता। ख़ैर गेट पर पहुंचे ऑफिसर ने टिकट और पहचान पत्र मांगे। उसके बाद सूटकेस चेक हुआ फिर लाइन में लग कर सीट नंबर लिया फिर सूटकेस उन्हीं को दे दिया। फिर पुनः लाइन में खड़े हुए हंड बैग चेक हुए फिर बैठे रहे हवाई जहाज आया तो फिर लाइन में लगे तब जा कर कहीं हवाई जहाज में बैठ पाए। निशांत जी मन ही मन सोच रहे थे साला इतना लाइन में तो हम नौकरी के फार्म भरने के चक्कर में नहीं लगे जितना ये हवाई अड्डा वालो ने लाइन में लगवा दिया । 2 घंटे बर्बाद हो गए इतनी देर में ट्रेन से कहां तक पहुंच गए होते। आखिरकार हवाई जहाज ने उड़ान भरी डर के मारे मीनल का हाथ पकड़ लिया फिर याद आया हम पति है ये क्या सोचेगी कैसा लड़का है डरता है तो झट से हाथ छोड़ दिया। उड़ान भरने के बाद मीनल ने पूछा आप पहली बार हवाई जहाज में बैठ रहे हो ? अब निशांत जी क्या बोलते समझ तो ये गई ही है तो धीमे स्वर में स्वीकार किया हां और तुम। मीनल बोली हम तो 4- 5 बार बैठ चुके हैं। जैसे तैसे हवाई यात्रा ख़तम हुई। गोवा आगमन हुआ।
गोवा पहुंचे तो होटल देख के निशान जी के आंखें फटी की फटी रह गई। आलीशान होटल ,बड़ा सा कमरा ,होटल में स्विमिंग पूल और बफेट लंच डिनर । थोड़ा आराम करने के बाद मीनल बोली मुझे तो भूख लग रही है डिनर भी लग गया होगा चलिए ना चलकर डिनर कर लेते है। निशांत जी डिनर करने पहुंच वहां विभिन्न प्रकार की प्लेट चम्मच ग्लास साला उनको समझ ही ना आए कौन सी प्लेट क्या खाने के लिए है। अब क्या किया जाए बीवी बोलेगी इनको तो कुछ भी नहीं आता ना हवाई जहाज में बैठे हुए ना होटल में खाए है कैसे मूर्ख लड़के से शादी हो गई । उन्होंने एक तरकीब निकाली बीवी से बोले मुझे थोड़ा गैस की  प्रॉब्लम लग रही है तुम खाओ मैं थोड़ी देर से खाता हूं। मीनल बोली अरे तो फिर फ्रेश लाइम सोड़ा ले लीजिए ना तभी उसने वेटर को बुलाया और एक फ्रेश लाइम सोडा ऑर्डर किया और वह खाना लेने निकल गई।  निशांत बड़े ध्यान से बैठे-बैठे वहां लोगों को और मीनल को देखता रहा किसने कौन सी प्लेट कहां से उठाई, किस में क्या रखा, कैसे खाया। जब तक  फ्रेश लाइम सोड़ा खत्म हुआ तब तक उनको समझ आ चुका था यहां कैसे खाना खाया जाए।
दो डरो का सामना तो निशांत जी कर चुके थे। उन्हें क्या पता था सुबह एक नई मुसीबत का सामना करना होगा नहाने के समय समझ ही नहीं आया नल कैसे चलाएं शावर कैसे चलाएं। नल चालू करे तो शावर चल जाए शावर बंद करें तो नल चल जाए बड़ी मुश्किल हुई नहाने में आधा समय तो गणित लगाने में निकल गया किस से क्या चलता है ।
खैर जैसे तैसे नहा कर घूमने के लिए निकले पहला दिन खुशनुमा बीता। दूसरे दिन फिर नई मुसीबत पत्नी जी ने रट लगा ली कि मुझे एडवेंचर स्पोर्ट्स करना है। अरे दादा कोई तो से समझाओ निशांत जी ने मन ही मन सोचा हमें तो पानी से भी डर लगता है और ऊंचाई से भी। उन्होंने बहुत कोशिश की पत्नी जी को समझाने की कई खतरे गिनाए और बोला मैं नहीं चाहता आपको कुछ हो जाए। पत्नी जी बोली अजी कुछ नहीं होगा देखिए ना कितने लोग कर रहे हैं चलिए ना करते हैं। अब मीनल को कौन समझाए कुछ कैसे नहीं होगा कहीं डर के मारे हमे हार्ट अटैक आ गया ना तो शादी के 1 हफ्ते बाद ही विधवा हो जाओगी तुम निशांत जी मन ही मन बुदबुदाए।  पत्नी जी ने पहले बनाना राइड की बीच समुद्र में निशांत जी को पानी में गिरा दिया गया। उधर से बड़ी बड़ी लहरें चली आ रही निशांत जी को एक पल के लिए लगा आज तो प्राण पखेरू उड़ गए पर शायद ये मीनल के सिंदूर की ही शक्ति थी जो वे बच गए। उसके बाद मीनल पेरासैलिंग करने पर अड़ गई। अभी पानी में गिराया अब हवा में लटका रही है निशांत जी ने इस बार खर्चे का हवाला दिया तो पत्नी जी का तुरंत मुंह फूल गया कितने कंजूस हो आप हमें नहीं पता था भला हनीमून में कोई पैसे का मुंह देखता है क्या। निशांत जी मन ही मन फिर बुदबुदाए पैसे का मुंह देखना तो बाद की बात है पहले ये सोच ले तू कल मेरा मुंह देखेगी या नहीं। नई नई शादी मना करते बन नहीं रहा कहते बन नहीं रहा कि डर लगता है वरना पत्नी नामर्द समझेगी एडवेंचर स्पोर्ट्स करते भी नहीं बन रहा अजीब कश्मकश थी।
आखिरकार बीवी की ज़िद के आगे निशांत जी की एक न चली ।पैरासेलिंग के दौरान शायद ही ऐसे कोई हिंदू देवी देवता बचे हो जिनका नाम निशांत जी ने ना लिया हो।ऐसे ही अनेक नए नए अनुभवों से भरा रहा निशांत जी के लिए गोवा दर्शन। हनीमून के दौरान एक बात तो निशांत जी को समझ आ गई बीवी बहुत बहादुर है उनकी अम्मा की तरह नहीं जिसे बापू ने जहां चाहा वहां चला दिया।
निशांत को हनीमून में उन सब चीजों का सामना करना पड़ा जिससे वह डरता था हवाई यात्रा, बड़े होटल में खाना , बड़े होटलों में रुकना , पैरासेलिंग और बनाना राइड। वापस आने के बाद बैंक में सहकर्मियों ने पूछा कैसा रहा हनीमून। निशांत जी बस इतना ही कह पाए एडवेंचर से परिपूर्ण।

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