इतिहास जब वर्तमान बन जाए
"आपकी बेटी की हालत बेहद गंभीर है,उसका तुरंत ऑपरेशन करना होगा। आप ज़रूरी फॉर्मेलिटी पूरी दीजिए।" कह कर डॉक्टर चला गया
संकेत के पांव तले जैसे ज़मीन ही खिसक गई थी। जिस नन्ही सी गुड़िया को इतने नाज़ों से पाला आज वो ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी।
संकेत के पांव तले जैसे ज़मीन ही खिसक गई थी। जिस नन्ही सी गुड़िया को इतने नाज़ों से पाला आज वो ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी।
संकेत भारी मन से रिसेप्शन पर गया जरूरी फार्म भरे पैसे जमा कराए। वो जो जो कहता गया संकेत वो सब करता गया उसकी कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या सही क्या गलत। उसका दिमाग तो एक ही उलझन में उलझा हुआ था उसकी गुड़िया ठीक तो हो जाएगी ना बच तो जाएगी ना। उस समय अगर कोई कहता तुम सारी प्रॉपर्टी मेरे नाम करदो मैं तुम्हारी बेटी को ठीक कर दूंगा तो शायद संकेत वो भी कर देता।
जल्दी जल्दी वो सारी फॉर्मेलिटी पूरी कर वापस आया उसकी पत्नी लता का तो रो रो कर बुरा हाल हो रहा था। डॉक्टर ने स्नेहा को ऑपरेशन थियेटर में शिफ्ट किया और ऑपरेशन चालू हो गया। तभी कुसुम वहां भागी भागी अाई स्नेहा कैसी है अब? उसने पूछा। कुसुम को देख लता से रहा ना गया और लाल आंखे किए उससे बोली "क्यों अाई हो तुम यहां? तुम्हारे बेटे ने देखो क्या हाल कर दिया है मेरी फूल सी बेटी का। क्या तुम्हारे बेटे का और तुम्हारा मन अब भी नहीं भरा जो यहां चली अाई हो। अगर गलती से भी मेरी बेटी को कुछ हो गया ना तो मैं तुम्हे और तुम्हारे बेटे को माफ नहीं करूंगी। बुरे कर्मो का फल हमेशा बुरा ही होता है। मेरी बेटी का ये हाल कर कभी चैन से नहीं रह पाएगा वो देखना।" संकेत ने जैसे तैसे लता को शांत करवाया की अब जो हो गया सो हो गया। यूं ऑपरेशन थियेटर के आगे लड़ाई करने से तकलीफ गुड़िया को ही होगी। लता जाकर अलग बैठ गई। उसके शांत होते ही कुसुम रोते हुए संकेत से बोली " अाई एम सॉरी, मुझे इस बात की बिल्कुल भी भनक नहीं थी कि तुम्हारी बेटी मेरे बेटे से प्यार करती है नहीं तो मैं उसकी शादी किसी और से नहीं होने देती।" संकेत ने भराए हुए गले से कहा "इट्स ओके कुसुम लता ने सही कहा बुरे कर्मो का फल बुरा ही होता है। सालो पहले तुम भी तो इसी हाल में होगी जिस।"
संकेत का दिल अतीत के उन सालों में पहुंच गया जब वो कुसुम से प्यार किया करता था। कुसुम उसके मुहल्ले की सबसे सुंदर लड़की थी हर लड़का उस पर मारता था पर वो किसी की तरफ आंख उठा कर भी नहीं देखती थी। उसकी यही बात संकेत को दीवाना कर गई। संकेत को लगने लगा जो लड़की इतनी सुन्दर होने के बाद भी किसी की तरफ नहीं देखती उसे तो हासिल करना ही होगा। उसके लिए कुसुम एक चैलेंज बन गई थी । वो तरह तरह की तरकीबें आजमाने लगा। पहले तो उसने कुसुम का टाइमटेबल नोट किया वो घर से कॉलेज के लिए कब निकलती , कब वापस आती है, शुक्रवार के दिन संतोषी माता के मंदिर कब जाती है इत्यादि। फिर शुरू हुआ चक्कर काटने का दौर जब भी वो घर से निकले या घर वापस आए संकेत उस समय ज़रूर उसके घर के आस पास घूमता रहता था। उसका पीछा करते करते कभी मंदिर, कभी कॉलेज तो कभी बाज़ार भी चला जाता। कभी ज़ोर से बातें करता कभी रेडियो सुनने का नाटक करता।हर वो काम करता जिससे वो उसकी तरफ ध्यान दे।
लगभग 3महीने की कड़ी मेहनत करने के बाद एक दिन जब वो कुसुम के कॉलेज के बाहर पानी पूरी वाले से ज़ोर ज़ोर से बातें कर रहा था, कुसुम ने उसे अपने पास बुलाया।
कुसुम: देखिए आप मेरा पीछा करना छोड़ दीजिए। क्यूंकि मेरी शादी हो चुकी है।
संकेत: क्या??? कब ??? किससे??
कुसुम: पिताजी ने बचपन में ही मेरी शादी किसी और से कर दी थी और मेरे पति बहुत अच्छे है मुझसे बहुत प्यार करते हैं। अभी वो भी पढ़ रहे हैं। एक बार मेरी पढ़ाई खत्म हो जाए और उनकी नौकरी लग जाए फिर हम लोग एक और बार शादी कर लेंगे सबके सामने।
संकेत: (हंसते हुए) क्या कहा तुम्हारी शादी बचपन में हो चुकी है।
कुसुम: आपके लिए ये मज़ाक का विषय होगा मेरे लिए नहीं।
संकेत: एक बात बताओ अगर उसकी अच्छी नौकरी नहीं लगी तो भी तुम उससे शादी करोगी?
कुसुम: जी हां क्युकी मेरे पिता की इज्ज़त का विषय है ये।
संकेत: तुमने कहा तुम्हारा पति तुमसे बहुत प्यार करता है। पर तुमने ये नहीं बताया क्या तुम भी उससे प्यार करती हो?
कुसुम: ज़्यादा होशियार मत बनिए आप मैं उससे प्यार करू या ना करू आपको इससे मतलब। और हां मेरा पीछा करना छोड़ दो और पढ़ाई पर ध्यान दो।
संकेत: समझ गया।
कुसुम : क्या समझे?
संकेत: तुम्हारे जवाब से दो बातें पता चल गई। पहली तुम उससे प्यार नहीं करती। दूसरी तुमको मेरी और मेरी पढ़ाई की बहुत फ़िक्र है। ज़रा संभल कर रहना कहीं ये फ़िक्र प्यार में ना बदल जाए।
कुसुम: देखिए आप मेरा पीछा करना छोड़ दीजिए। क्यूंकि मेरी शादी हो चुकी है।
संकेत: क्या??? कब ??? किससे??
कुसुम: पिताजी ने बचपन में ही मेरी शादी किसी और से कर दी थी और मेरे पति बहुत अच्छे है मुझसे बहुत प्यार करते हैं। अभी वो भी पढ़ रहे हैं। एक बार मेरी पढ़ाई खत्म हो जाए और उनकी नौकरी लग जाए फिर हम लोग एक और बार शादी कर लेंगे सबके सामने।
संकेत: (हंसते हुए) क्या कहा तुम्हारी शादी बचपन में हो चुकी है।
कुसुम: आपके लिए ये मज़ाक का विषय होगा मेरे लिए नहीं।
संकेत: एक बात बताओ अगर उसकी अच्छी नौकरी नहीं लगी तो भी तुम उससे शादी करोगी?
कुसुम: जी हां क्युकी मेरे पिता की इज्ज़त का विषय है ये।
संकेत: तुमने कहा तुम्हारा पति तुमसे बहुत प्यार करता है। पर तुमने ये नहीं बताया क्या तुम भी उससे प्यार करती हो?
कुसुम: ज़्यादा होशियार मत बनिए आप मैं उससे प्यार करू या ना करू आपको इससे मतलब। और हां मेरा पीछा करना छोड़ दो और पढ़ाई पर ध्यान दो।
संकेत: समझ गया।
कुसुम : क्या समझे?
संकेत: तुम्हारे जवाब से दो बातें पता चल गई। पहली तुम उससे प्यार नहीं करती। दूसरी तुमको मेरी और मेरी पढ़ाई की बहुत फ़िक्र है। ज़रा संभल कर रहना कहीं ये फ़िक्र प्यार में ना बदल जाए।
कुसुम उसके जाने के बाद कई बार उसकी कही गई बातो को सोचती रही। क्या मैं सच में अपने पति से प्यार करती हूं? क्या मुझे उस लड़के की फ़िक्र होने लगी है? बचपन से ही कुसुम को उसके मां बाप ने हरीश के बारे में बताया था कि यही तेरा पति है और तुझे सारी ज़िन्दगी इसी के साथ रहना है। इसलिए कुसुम ने कभी किसी और लड़के की तरफ देखा भी नहीं था। उसने कभी ये सपने नहीं सजाए कि उसका जीवनसाथी कैसा होना चाहिए या कैसा होगा क्यूंकि उसे पता था उसका जीवनसाथी हरीश है। पर ना जाने क्यों इस लड़के को देख लगता था काश ये उसका जीवनसाथी होता।
वहीं संकेत के दिल में कुसुम के लिए बहुत खास जगह बन गई। क्या लड़की थी इतनी सुंदर है फिर भी बिल्कुल घमंड नहीं। जो मां बाप ने के दिया झट से मान गई बिना कोई सवाल जवाब के। अगर उस लड़के की नौकरी अच्छी नहीं भी लगी तो भी पिता की इज्जत के लिए अपना सारा जीवन दाव पर लगाने को तैयार थी। संकेत के लिए अब कुसुम एक चैलेंज नहीं रह गई थी बल्कि प्यार हो गया था उससे।
कुसुम के समझाने के बाद भी संकेत नहीं माना उसके घर के , कॉलेज के आस पास चक्कर काटता रहा। उसके घर कभी कंप्यूटर सुधारने कभी ब्लड डोनेशन कैंप का प्रचार करने के बहाने आने जाने भी लगा। किसी शादी में जब कुसुम जाती तो पंगत में उसे कभी ज़्यादा पूरी परस देता कभी ज़्यादा गुलाब जामुन। कुल मिला कर करीब एक साल जी जान से कुसुम के आगे पीछे चक्कर काटने के बाद एक दिन कुसुम ने उसे हां के ही दिया।
दोनों में प्यार हुआ। ऐसा प्यार जिसकी मिसाल कॉलेज के लड़के लड़कियां दिया करते थे। संकेत कुसुम की हर छोटी बड़ी खुशी का ध्यान रखता था। कुसुम को लगने लगा था संकेत उससे बहुत प्यार करता है और वो उसका साथ कभी नहीं छोड़ेगा। वो उसके प्यार पर खुद से भी ज़्यादा भरोसा करती थी।
धीरे धीरे समय बीता। कुसुम की पढ़ाई ख़त्म हो गई, संकेत की नौकरी कपड़े की फैक्ट्री में लग गई और हरीश की भी नौकरी एल अाई सी में लग गई।घरवालों ने कुसुम और हरीश की शादी की तैयारियां शुरू कर दी। इधर संकेत के घरवालों ने भी लड़की देखना शुरू कर दी। कुसुम ने संकेत से कहा मैं तुम्हारे अलावा किसी और से शादी नहीं करूंगी हम दोनों को अपने घर में बात करनी होगी। दोनों ने तय किया आज दोनों ही अपने घरवालों से बात करेंगे। कुसुम ने अपने पिता और हरीश दोनों को ही संकेत का सच बताया। हालांकि हरीश संकेत से ज़्यादा अच्छा कमाता था सरकारी नौकरी में भी था बावजूद इसके कुसुम संकेत से शादी करने के लिए अड़ गई। एक लड़की के लिए ये बहुत मुश्किल होता है घरवालों कि मर्ज़ी के खिलाफ जाना। वहीं संकेत ने भी कोशिश की पर पिताजी के आगे उसका मुंह नहीं खुला। पिताजी ने संकेत से कह दिया था अगर अपनी मर्ज़ी से शादी करनी है तो इस घर से सारे रिश्ते तोड़ने होंगे।
आखिरकार संकेत पीछे हट गया। कुसुम ने कितनी बार उससे मिलने की कोशिश की उससे कहा एक बार फिर पिताजी से बात करो। पर संकेत नहीं माना उसने कुसुम से मिलना जुलना भी छोड़ दिया। जिस प्यार पर कुसुम को इतना भरोसा था वो कमज़ोर निकला। संकेत ने पिताजी की मर्ज़ी से शादी की और कुसुम की शादी हरीश से हो गई। सब कुछ जानते हुए भी हरीश ने कुसुम का साथ नहीं छोड़ा।
आज 25साल बाद जाने कैसे कुसुम का बेटा और संकेत की बेटी कॉलेज में एक दूसरे से मिले। कब उनमें प्यार हुआ पता नहीं। पर आज भी लड़का ही पीछे हटा विराज ने किसी और से शादी कर स्नेहा को छोड़ दिया। उसी कारण आज स्नेहा ने घर की छत से छलांग लगा दी और अब ज़िंदगी और मौत के बीच झूल रही है।
आज संकेत को एहसास हो रहा है प्यार में धोखा मिलना किसी को किस हद तक तोड़ सकता है। उस समय कुसुम के लिए भी कितना मुश्किल रहा होगा सब झेलना। एक तरफ टूटा हुआ दिल। दूसरी तरफ हरीश और उसके पिता से निगाहें मिलना,कल जिनके सामने गर्व से अपने प्यार के लिए लड़ रही थी आज वही प्यार झूठा निकला। शायद उसके पास हरीश था इसीलिए वो ये सब झेल गई वरना हो सकता है उसका हाल भी स्नेहा जैसा होता। आज उसे समझ आ रहा था कि उससे कितनी बड़ी गलती हो गई आज उस गलती की सज़ा उसकी बेटी को मिल रही है। आज इतिहास फिर खुद को दोहरा रहा था और वर्तमान बन उसके सामने खड़ा था।
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